जनगणना पूरी होने तक महिला आरक्षण पर चर्चा नहीं : अखिलेश यादव

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जनगणना पूरी होने तक महिला आरक्षण पर चर्चा नहीं : अखिलेश यादव

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 08:59 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 08:59 PM IST

लखनऊ, 19 अप्रैल (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जनगणना पूरी होने तक महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यादव ने कहा, “सरकार के इरादों की हार और परिसीमन विधेयक को पारित कराने में नाकामी इस बात का संकेत है कि सरकार लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करती। असल मायने में विपक्ष ही जनता की आवाज है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति पर आधारित है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले लोगों के बीच अविश्वास पैदा किया जाता है, फिर उन्हें अलग-अलग समूहों में बांटकर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जाता है और अंत में डर का इस्तेमाल कर समर्थन हासिल किया जाता है।”

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला मतदाताओं के बीच भी विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब जागरूक हैं और महंगाई, शोषण तथा सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों पर ऐसी राजनीति का जवाब देंगी।

प्रस्तावित महिला आरक्षण व्यवस्था की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पुराने जनगणना आंकड़ों के आधार पर बनाई गई नीति कमजोर होगी।

यादव ने कहा, “यदि 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, तो महिला आरक्षण की पूरी नींव ही गलत हो जाती है।”

यादव ने कहा कि दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जो नयी जनगणना के बिना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त तैयारी के केवल आरक्षण देना ‘दिखावा’ बनकर रह जाएगा और इसके साथ क्षमता निर्माण तथा आवश्यक सहायक ढांचे का विकास भी जरूरी है।

यादव ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण और परिसीमन जैसे कदम उठाने से पहले नयी जनगणना कराना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना में देरी से जाति-आधारित आंकड़ों का संकलन भी प्रभावित होता है, जिससे अधिकारों और प्रतिनिधित्व का न्यायसंगत वितरण बाधित होता है।

समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया का उल्लेख करते हुए यादव ने कहा कि उनके विचारों में महिलाओं को एक वंचित वर्ग माना गया है, जिनके लिए विशेष नीतिगत उपाय आवश्यक हैं।

भाषा

चंदन, आनन्द रवि कांत