OP Rajbhar On Akhilesh Yadav / Image Source : AI
लखनऊ : OP Rajbhar On Akhilesh Yadav उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर शुक्रवार को किए गए अपने लंबे पोस्ट में उन्होंने अखिलेश यादव और उनके समर्थकों के लिए ‘कंसवंशी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए गाजीपुर और अमेठी की घटनाओं को लेकर सपा को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा केवल दिखावा है, जबकि जमीनी स्तर पर पिछड़े और दलित समाज के लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं।
पोस्ट की शुरुआत में ही ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत और राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा, ‘ऐसा लगता है कि आप भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हो ही नहीं सकते। आप लोग कृष्ण नहीं, कंसवंशी हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में 37 सीटें जीतने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और अधिक आक्रामक हो गए हैं और PDA के नाम पर केवल राजनीतिक नौटंकी की जा रही है।
राजभर ने गाजीपुर की घटना का हवाला देते हुए दावा किया कि राजभर समाज की दो मासूम बच्चियों के साथ केवल इसलिए बर्बरता हुई क्योंकि वे यादव समाज के खेत में घास काटने चली गई थीं। Om Prakash Rajbhar Statementउन्होंने कहा कि 13 वर्षीय आंचल राजभर की हत्या कर दी गई, जबकि 12 वर्षीय चांदनी राजभर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। उन्होंने इस मामले में अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए।
अपने पोस्ट में ओपी राजभर ने अमेठी की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कश्यप युवक की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने यादव समाज की युवती से प्रेम विवाह किया था। राजभर ने दावा किया कि युवक को बंधक बनाकर उसके साथ बर्बरता की गई और उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रेम विवाह करना अपराध है और इस मामले में समाजवादी पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
राजभर ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि “सर तन से जुदा” जैसी सोच रखने वालों के साथ रहने से सपा नेताओं की मानसिकता और अधिक कट्टर हो गई है। उन्होंने दावा किया कि यही वजह है कि ऐसे मामलों पर पार्टी नेतृत्व चुप रहता है।
पोस्ट के अंत में ओपी राजभर ने कहा कि यदि किसी की लड़ाई है तो वह उनसे सीधे लड़े। उन्होंने अपना सरकारी आवास का पता लिखते हुए चुनौती भी दी। साथ ही राजभर, निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, मांझी, कश्यप, कहार, प्रजापति, कुम्हार, पाल, गड़रिया, नोनिया, तेली, लोहार, नाई, बंजारा, चौहान, माली, दर्जी, धीमर, धोबी, गोंड, वाल्मीकि, डोम, पासी, मुसहर समेत कई पिछड़ी और दलित जातियों का नाम लेते हुए उन्हें एकजुट होने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि यदि ये समाज एक साथ खड़े हो गए तो समाजवादी पार्टी की राजनीति को बड़ा नुकसान होगा।
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