हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के नए सज्जादानशीं बने पीरजादा अरशद फरीदी

हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के नए सज्जादानशीं बने पीरजादा अरशद फरीदी

हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के नए सज्जादानशीं बने पीरजादा अरशद फरीदी
Modified Date: July 13, 2026 / 09:55 pm IST
Published Date: July 13, 2026 9:55 pm IST

आगरा, 13 जुलाई (भाषा) विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में सोमवार को सूफी परंपरा के अनुसार दस्तारबंदी की रस्म के साथ पीरजादा अरशद फरीदी को नया सज्जादानशीं घोषित किया गया।

दिवंगत सज्जादानशीं पीरजादा रईस मियां चिश्ती के पुत्र पीरजादा अरशद फरीदी की दस्तारबंदी कर उन्हें दरगाह की आध्यात्मिक गद्दी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सूफी परंपरा के अनुसार, किसी सज्जादानशीं के इंतकाल के बाद उनके उत्तराधिकारी की दस्तारबंदी की रस्म अदा की जाती है। यह आध्यात्मिक समारोह हजरत शेख सलीम चिश्ती की ऐतिहासिक चिल्लागाह पर आयोजित किया गया, जहां वह इबादत किया करते थे।

जानकारों के अनुसार, पीरजादा अरशद फरीदी फतेहपुर सीकरी दरगाह के 17वें आध्यात्मिक सज्जादानशीं होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 500 वर्षों से नए सज्जादानशीं की दस्तारबंदी की रस्म इसी पवित्र स्थान पर निभाई जाती रही है।

पीरजादा रईस मियां चिश्ती का आठ जुलाई 2026 की देर रात लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। अगले दिन उन्हें फतेहपुर सीकरी स्थित दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके इंतकाल से सूफी समुदाय और देशभर के अकीदतमंदों में शोक व्याप्त हो गया।

पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने 2025 में अपने जीवनकाल में आयोजित एक समारोह में ही अपने पुत्र अरशद फरीदी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। सूफी परंपरा के अनुसार, सज्जादानशीं का औपचारिक दायित्व पूर्व सज्जादानशीं के इंतकाल के बाद दस्तारबंदी की रस्म पूरी होने पर सौंपा जाता है।

दस्तारबंदी समारोह में दरगाह से जुड़े गणमान्य लोग, उलमा, सूफी संत, सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। इस अवसर पर आस्ताना-ए-आलिया कादरिया के सज्जादानशीं हजरत सिनवान शाह कादरी, खानकाह-ए-फरीदिया, हैदराबाद के सज्जादानशीं शुजाउद्दीन शाहिद फरीदी तथा विभिन्न दरगाहों के सज्जादानशीं और अन्य सम्मानित सूफी हस्तियां भी उपस्थित रहीं।

समारोह के दौरान दिवंगत पीरजादा रईस मियां चिश्ती को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनकी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी


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