सीतापुर के 150 वर्ष पुराने मिशन स्कूल की भूमि विवाद में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया निर्देश
सीतापुर के 150 वर्ष पुराने मिशन स्कूल की भूमि विवाद में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया निर्देश
लखनऊ, 13 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सीतापुर स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने मेथोडिस्ट मिशन बालिका माध्यमिक विद्यालय की भूमि से जुड़े विवाद में रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए स्कूल को अंतरिम राहत दी।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विवादित भूमि के स्वरूप में कोई बदलाव न किया जाए और अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए मामले को 20 जुलाई को शीर्ष 10 मामलों की सूची में शामिल करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि स्कूल लगभग 150 वर्षों से विवादित भूमि पर संचालित हो रहा है, लेकिन उसे ध्वस्त किए जाने की आशंका के कारण अवकाश के दिन भी तत्काल सुनवाई की आवश्यकता पड़ी।
यह याचिका परिसर में स्थित एक चर्च से भी संबंधित है।
याचिका के अनुसार, सीतापुर के खैराबाद परगना के छावनी कदीम गांव स्थित 3.562 हेक्टेयर भूमि को सरकारी अभिलेखों में गलत तरीके से ‘नजूल भूमि’ के रूप में दर्ज कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पूर्वजों ने यह संपत्ति वर्ष 1862 में खरीदी थी और तभी से वहां स्कूल और चर्च संचालित हो रहे हैं।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सीतापुर के जिलाधिकारी के 24 जून 2026 के आदेश का उन हिस्सों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, जहां स्कूल और चर्च स्थित हैं।
सरकार का कहना था कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल उन हिस्सों तक सीमित थी, जिन पर कथित अतिक्रमण किया गया था। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि 10 जुलाई 2026 को ध्वस्तीकरण के बाद विवादित भूमि के एक हिस्से का कब्जा सीतापुर नगर परिषद को सौंप दिया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक विवादित भूमि के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।
भाषा सं आनन्द खारी
खारी

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