Vande Bharat: संगम तट पर टकराव..रुका रथ, बढ़ा तनाव! अनशन पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद… प्रयागराज में छिड़ा धर्म ‘युद्ध’, देखें वीडियो

Mauni Amavasya: संगम तट पर टकराव..रुका रथ, बढ़ा तनाव! अनशन पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद... प्रयागराज में छिड़ा धर्म 'युद्ध', देखें वीडियो

Vande Bharat: संगम तट पर टकराव..रुका रथ, बढ़ा तनाव! अनशन पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद… प्रयागराज में छिड़ा धर्म ‘युद्ध’, देखें वीडियो

Mauni Amavasya Prayagraj/Image Source: ANI

Modified Date: January 19, 2026 / 11:36 pm IST
Published Date: January 19, 2026 11:34 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मौनी अमावस्या पर बवाल
  • माघ मेले में टकराव
  • रथ रोका गया, शंकराचार्य बिना स्नान लौटे

Mauni Amavasya:  प्रयागराज के माघ मेले से एक विवाद उठ खड़ा हुआ है जिसने सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और संत सम्मान को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। मौनी अमावस्या जैसे पावन दिन पर ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की रथ यात्रा को लेकर जो कुछ हुआ, उसने आस्था और शासन के टकराव को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। सवाल ये नहीं कि नियम क्या कहते हैं, सवाल ये है कि क्या सदियों पुरानी धार्मिक मर्यादाओं को आज व्यवस्था के नाम पर चुनौती दी जा रही है? क्या ये सिर्फ एक रथ रोकने का मामला है, या फिर सनातन परंपरा ही निशाने पर है?

Mauni Amavasya:  प्रयागराज का पावन माघ मेला, जहां संगम की रेत पर आस्था उतरती है और जहां सनातन परंपराएं अपने पूरे वैभव और सम्मान के साथ जीवित दिखाई देती हैं। लेकिन इसी माघ मेले में अब एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने प्रशासन और संत सम्मान दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौनी अमावस्या के दिन, जब संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ था, ठीक उसी दिन ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी परंपरागत पालकी, यानी रथ यात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए निकले थे। लेकिन रास्ते में पुलिस ने रथ यात्रा को रोक दिया। प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा का हवाला देते हुए शंकराचार्य से पैदल चलकर स्नान के लिए जाने का आग्रह किया। शंकराचार्य के शिष्यों ने इसे परंपरा और सम्मान का प्रश्न बताते हुए मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद माहौल गरमाया, बहस बढ़ी, धक्का-मुक्की हुई और शंकराचार्य के शिष्यों के साथ मारपीट के आरोप भी लगे।

Mauni Amavasya:  इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर शंकराचार्य ने संगम स्नान नहीं किया और बिना स्नान किए ही वापस लौट आए। लेकिन यहीं से विवाद और गहरा हो गया। वहीं इस मामले पर प्रयागराज प्रशासन का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना अनुमति और स्थापित व्यवस्थाओं के विपरीत, करीब 200 अनुयायियों के साथ रथ पर सवार होकर संगम क्षेत्र में पहुंचे थे। सोमवार को शंकराचार्य अन्न-जल त्याग कर अनशन पर बैठ गए। कड़ाके की ठंड के बीच खुले फुटपाथ पर अपने पंडाल में साधना करते हुए उन्होंने विरोध दर्ज कराया। शंकराचार्य का कहना है कि इतिहास गवाह है जब-जब शंकराचार्य संगम स्नान के लिए गए हैं, वे हमेशा पालकी में ही गए हैं। यह कोई सुविधा नहीं, बल्कि परंपरा और सम्मान का विषय है। इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा।

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Mauni Amavasya:  इसी बीच शंकराचार्य से जुड़ा एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो साल 2015 का है, जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी। उस वक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई थी। इसी फैसले के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी शामिल थे। प्रयागराज के माघ मेले में एक तरफ प्रशासन है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ शंकराचार्य हैं, जो परंपरा, सम्मान और धार्मिक मर्यादा पर अडिग हैं। सवाल अब सिर्फ रथ यात्रा का नहीं, बल्कि आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन का है। क्या प्रशासन संवाद के जरिए समाधान निकालेगा, या फिर यह टकराव और लंबा खिंचेगा?

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लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।