Shankaracharya Magh Mela 2026 Controversy/Image Source: @jyotirmathah
प्रयागराज: Shankaracharya Magh Mela 2026 Controversy: प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण की ओर से ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को भेजे गए नोटिस पर अब उनकी ओर से विस्तृत जवाब दिया गया है। मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में यह सवाल उठाया गया था कि जब शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो वे स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं।
Shankaracharya Magh Mela 2026 Controversy: इस नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा ने आठ पन्नों का विस्तृत प्रतिवाद मेला प्राधिकरण को भेजा है। यह जवाब मेला प्राधिकरण की आधिकारिक ई-मेल आईडी के साथ-साथ सेक्टर-4 स्थित मेला प्राधिकरण कार्यालय को भी प्रेषित किया गया। बताया गया है कि जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की टीम नोटिस का जवाब देने मेला प्रशासन के कार्यालय पहुंची तो वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। इसके बाद अनुयायियों ने गेट पर ही जवाब चस्पा कर दिया। अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा ने अपने जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया है। जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने जीवनकाल में ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। 11 सितंबर 2022 को उनके ब्रह्मलीन होने के अगले दिन 12 सितंबर 2022 को वैदिक विधि-विधान के साथ उनका विधिवत अभिषेक किया गया था। इस तथ्य का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश में भी दर्ज है।
प्रशाशन द्वारा महाराज श्री को भेजा गया दूसरा नोटिस एवं तुरंत प्रशासन को महाराज श्री की और से जवाब भी दिया गया। #प्रयागराज #माघमेला #ShankaracharyaJyotirmath #shankaracharyaavimukteshwaranandSaraswatijimaharaj #badrivishal #himalaya #SiddharthSamwat pic.twitter.com/LymwION8G2
— 1008.Guru (@jyotirmathah) January 22, 2026
Shankaracharya Magh Mela 2026 Controversy: जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर किसी भी न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं है। इसके साथ ही श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठ के शंकराचार्यों के समर्थन का दावा भी किया गया है। ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पंजीकृत वसीयत को वैध बताते हुए कहा गया है कि गुजरात हाईकोर्ट उस वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका पहले ही खारिज कर चुका है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि 19 जनवरी की आधी रात के बाद मेला प्राधिकरण के अधिकारियों, कानूनगो और पुलिस द्वारा उनके मुवक्किल के माघ मेला शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चिपकाया गया जबकि वे विश्राम कर रहे थे। जवाब में इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए कहा गया है कि इसका उद्देश्य शंकराचार्य को बदनाम करना और सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करना है।
जवाब में यह भी कहा गया है कि नोटिस के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सामाजिक, आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक छवि को नुकसान पहुंचा है। अधिवक्ता ने मेला प्रशासन की इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में हस्तक्षेप करार देते हुए इसे न्यायालय की अवमानना के समान बताया है। चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर माघ मेला में भूमि आवंटन विवाद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध लगातार जारी है। वे अपने कैंप के बाहर सड़क पर टेंट लगाकर धरने पर बैठे हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेने वाले लोग धर्म में बाधा क्यों बन रहे हैं? उनका तर्क है कि शंकराचार्य के स्नान के बिना मेला पूर्ण नहीं माना जाता, जैसे यज्ञ बिना नारियल की आहुति के अधूरा रहता है।
Shankaracharya Magh Mela 2026 Controversy: वहीं ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में मध्यप्रदेश के पूर्व धर्मस्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो व्यवहार आज शंकराचार्य के साथ किया जा रहा है, वैसा व्यवहार अंग्रेजों के शासनकाल में भी नहीं किया गया। पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी सरकार शंकराचार्य से यह कह रही है कि वे सबूत दें कि वे शंकराचार्य हैं जबकि यह सवाल अंग्रेजों ने भी कभी नहीं पूछा। उन्होंने इसे सनातन हिंदू परंपरा और आस्था का खुला अपमान बताया। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के समर्थकों के साथ मारपीट की गई और यह स्थिति पूरी तरह बीजेपी सरकार द्वारा पैदा की गई है। उन्होंने कहा कि धर्म और परंपरा का इस तरह अपमान किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।पीसी शर्मा ने यह भी कहा कि जब धर्म और आस्था का अपमान होता है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने हाल ही में हुई एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना का हेलीकॉप्टर भी उसी क्षेत्र में गिरा जहां इस तरह का अपमान हुआ जब अपमान होता है तो ऐसी घटनाएं घटती हैं। पीसी शर्मा ने ऐलान किया कि वे 24 जनवरी को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर उपवास रखकर शंकराचार्य के समर्थन में विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने बीजेपी से सवाल करते हुए कहा कि क्या यही उसका हिंदुत्व है।