एसआईआर प्रक्रिया गैर-कानूनी, लोकतंत्र के साथ और जनता के मताधिकारों का हनन : कांग्रेस

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एसआईआर प्रक्रिया गैर-कानूनी, लोकतंत्र के साथ और जनता के मताधिकारों का हनन : कांग्रेस

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  • Publish Date - April 10, 2026 / 09:37 PM IST,
    Updated On - April 10, 2026 / 09:37 PM IST

लखनऊ, 10 अप्रैल (भाषा) अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की उत्तर प्रदेश इकाई ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को गैर-कानूनी करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि यह लोकतंत्र के साथ धोखा है तथा जनता के मतदान संबंधी अधिकारों का हनन है।

कांग्रेस की राज्य इकाई के मुख्यालय की ओर से यहां जारी एक बयान में कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष अजय राय ने कहा, ”उत्तर प्रदेश में कराई गई एसआईआर की प्रक्रिया गैर-कानूनी है और लोकतंत्र के साथ धोखा है तथा जनता के मतदान संबंधी अधिकारों का हनन है।”

उन्‍होंने एसआईआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ”पूर्व में आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने जब निर्वाचन आयोग से अपनी आरटीआई में एसआईआर संबंधी पत्रावली और आदेशों की कॉपी मांगी तो आयोग के प्रमुख सचिव ने अपने जवाब में बताया कि आयोग में एसआईआर और उसके आदेश संबंधी कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं है और न ही कोई आदेश जारी किया गया है।”

राय ने सवाल किया, ”तब क्या एसआईआर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आदेश पर हो रहा है? दूसरी तरफ संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे व्यापक पैमाने पर एसआईआर कराया जा सके।”

राय ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा भाजपा के दबाव में एसआईआर के दौरान गलत काम करने के लिए बीएलओ (बूथ स्तरीय अधिकारी) पर दबाव बनाया गया जिसके चलते प्रदेश में कई बीएलओ की जान चली गई।

उन्‍होंने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश की 18 वर्ष से अधिक की आबादी 16 करोड़ से ज्यादा है तब वर्तमान एसआईआर के बाद मतदाता सूची जिसमें मतदाताओं की संख्या पहले 15 करोड़ से अधिक थी और अब उससे और ज्यादा बढ़नी चाहिए थी, उसकी जगह वह मात्र 13 करोड़ 69 लाख कैसे हो गई है?

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों तथा नगर निकायों के लिए बनी हुई मतदाता सूची में भी मतदाताओं की संख्या 16 करोड़ से अधिक है जबकि वो भी राज्‍य निर्वाचन आयोग द्वारा बनाई गई है।

राय ने कहा कि यह व्यापक जांच का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में किन लोगों के नाम सूची से काटे गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह बंगाल की तरह किसी समुदाय विशेष के लोगों के नाम एक रणनीति के तहत काटे गए हैं?

इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि मतदाता सूची तैयार करने का कार्य 27 अक्टूबर, 2025 से 10 अप्रैल, 2026 तक सभी 75 जिलों और 403 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।

रिनवा ने बताया कि अंतिम सूची में छह जनवरी को जारी मसौदा सूची की तुलना में 84 लाख से अधिक मतदाताओं की वृद्धि हुई है, जिससे राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ हो गई है।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत