लखनऊ, 13 जुलाई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में बदलाव ला सकता है, लेकिन वह किसी मां को यह भरोसा नहीं दिला सकता कि उसका बच्चा ठीक हो जाएगा।
उन्होंने केजीएमयू, लखनऊ के उत्तीर्ण छात्रों से मरीजों के प्रति सहानुभूति और करुणा के भाव के साथ काम करने का आह्वान किया।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से विकसित हो रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिंथेटिक बायोलॉजी, जीन एडिटिंग और प्रिसिजन मेडिसिन जैसी नई तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा और स्वरूप को बदल रही हैं।
उन्होंने छात्रों से सीखने की प्रक्रिया को हमेशा जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा कि आज एआई का युग है और चिकित्सा समेत कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक मां को यह आश्वासन नहीं दे सकता कि उसका बच्चा बीमारी से ठीक हो जाएगा। यह किसी बुजुर्ग व्यक्ति का हाथ पकड़कर यह नहीं कह सकता कि चिंता मत कीजिए, हम सब ठीक कर देंगे।’’
उन्होंने कहा कि तकनीक बुद्धिमान हो सकती है, लेकिन उसमें मानवीय संवेदना नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि यह मेडिकल रिपोर्ट और चार्ट का विश्लेषण कर सकती है, लेकिन मरीज के मन के दर्द और भावनाओं को नहीं समझ सकती।
सिंह ने कहा, ‘‘इसलिए आपको सहानुभूति और करुणा के साथ काम करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जान बचाना सबसे बड़ा कर्तव्य है और इसके लिए हमेशा बड़े संसाधनों या संस्थागत सहयोग की जरूरत नहीं होती, बल्कि संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
लखनऊ लोकसभा सीट से सांसद सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मन में जीवन रक्षा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की भावना हो, तो परिस्थितियां कभी उसके रास्ते में बाधा नहीं बनतीं।
भाषा जफर अरूनव नरेश मनीषा
मनीषा