लखनऊ, 24 जून (भाषा) अलीगंज की कुख्यात इमारत मंगलवार की रात एक भयानक मंज़र पेश कर रही थी..भूतहा सन्नाटे के बीच लोग धीरे धीरे इमारत के आसपास आ रहे थे…एक आदमी वहां मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए फूल रख गया। चेहरों पर अफसोस का भाव लिए लोग इमारत की तस्वीरें ले रहे हैं, रील बना रहे हैं।
इमारत उन 15 लोगों की दिल दहला देने वाली चीखों की गवाह है जो भीषण अग्निकांड में जिंदा स्वाहा हो गए।
इमारत के सामने की तरफ़ लोहे का जला हुआ फ़्रेम और किताबों की अलमारियाँ हैं। हाल के सालों में लखनऊ की सबसे भयानक आग की घटनाओं में से एक की गवाह इस जगह को पीली पुलिस टेप से घेर दिया गया है।
मंगलवार को आधी रात के करीब, एक व्यक्ति फूल और पीड़ितों की एक तस्वीर लेकर आया। उसने इमारत के बाहर एक बेंच पर तस्वीर रखी और उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद वह खामोशी के साथ वहां से चला गया।
आने वालों में भुवन श्रीवास्तव के दोस्त भी शामिल थे; वह उन कुछ खुशनसीब लोगों में से एक था जो तार से नीचे फिसलकर आग से बच निकलने में कामयाब रहे थे।
दोस्तों में से एक ने पीटीआई भाषा को बताया कि वे श्रीवास्तव की मोटरसाइकिल लेने आए थे, जो सोमवार को उसे सीधे अस्पताल ले जाए जाने के बाद से ही उसी जगह पर खड़ी थी।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि पहचान-पत्रों की उचित जांच-पड़ताल के बाद ही सामान लौटाया जा रहा है।
काली पड़ चुकी इमारत के बाहर तैनात एक पुलिसकर्मी ने कहा, ‘अब यह जगह कुछ डरावनी सी लगती है, खासकर रात के समय।’
ऊषा मेहता मार्ग पर इमारत के पास से गुज़रने पर गाड़ियां धीमी हो जाती हैं; कुछ लोग तुरंत अपने मोबाइल फ़ोन निकाल कर खाक हो चुकी इमारत की तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड करते देखे गए।
लोग उत्सुकतावश भी इमारत को देखने के लिए आ रहे हैं।
राम शंकर इस इलाके में नहीं रहते लेकिन काम से घर जाते समय वह इस इमारत को देखने के लिए विशेष तौर पर इधर आए।
उनका कहना था,‘‘ जिस तरह लोगों की जान गई, वह दिल दहला देने वाला है।’’
तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर आग लग गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए।
अधिकारियों का कहना है कि इमारत का कथित तौर पर एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा था। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
भाषा किशोर जफर
नरेश
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