उप्र : पीलीभीत डीआईओएस कार्यालय में 5.5 करोड़ के गबन का खुलासा, चपरासी समेत सात गिरफ्तार

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उप्र : पीलीभीत डीआईओएस कार्यालय में 5.5 करोड़ के गबन का खुलासा, चपरासी समेत सात गिरफ्तार

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  • Publish Date - May 3, 2026 / 12:38 AM IST,
    Updated On - May 3, 2026 / 12:38 AM IST

पीलीभीत, दो मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में कथित 5.5 करोड़ रुपये के गबन मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी चपरासी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी की दो पत्नियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के बैंक खातों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज कर दी गई है। मामले में मुख्य आरोपी की पहली पत्नी जमानत पर बाहर है।

पुलिस ने बताया कि चपरासी की पहली पत्नी अर्शी खातून को फरवरी में गिरफ्तार किया गया था, जो मार्च के अंतिम सप्ताह में जमानत पर रिहा हो गई थी। इसके अलावा उसकी दो पत्नियां लुबना और अजारा खान, साली, सास तथा अन्य परिचितों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर बताया था कि ट्रेजरी से 1.15 करोड़ रुपये निजी खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। इसके बाद जिलाधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि डीआईओएस कार्यालय से पिछले आठ वर्षों से फर्जी शिक्षकों के नाम पर निजी खातों में धनराशि भेजी जा रही थी।

पुलिस के अनुसार, बीसलपुर इंटर कॉलेज में तैनात चपरासी इलहाम ने करीब आठ साल पहले जुगाड़ के जरिए डीआईओएस कार्यालय में अटैचमेंट हासिल किया था। वह सैलरी से जुड़े टोकन जनरेट करता था और उसने अपनी पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों को शिक्षक, बाबू और ठेकेदार दिखाकर फर्जी आईडी तैयार की थीं।

इसके माध्यम से फर्जी वेतन और कार्य भुगतान के नाम पर सात खातों में कुल 8.15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को डीआईओएस राजीव कुमार की तहरीर पर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में इलहाम और अर्शी खातून के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

उन्होंने बताया कि जांच में 53 संदिग्ध खाते सामने आए हैं और अब तक 5.5 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं। आरोपी इलहाम ने 30 मार्च को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत प्राप्त कर ली थी।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत