उप्र सरकार गो संरक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिए 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार करेगी

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उप्र सरकार गो संरक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिए 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार करेगी

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  • Publish Date - August 16, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - August 16, 2026 / 08:29 PM IST

लखनऊ, 16 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार गो संरक्षण को मजबूत करने और युवा पीढ़ी को इस अभियान से जोड़ने के अपने प्रयासों के तहत गांवों में करीब 10,000 ‘गो मित्रों’ को प्रशिक्षित करेगी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में पशुओं के संरक्षण और देखभाल के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना होगा।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे।

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकता में रखा है।

सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण सिर्फ गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों।

उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ गोशालाओं को गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

गुप्ता ने कहा कि अभियान में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को जोड़ने पर होगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि पहले मुख्य प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे जो बाद में अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इससे गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क बनेगा।

गुप्ता ने कहा कि गो संरक्षण में पहले से रुचि रखने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बयान के अनुसार, प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जिनमें 12 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

बयान के अनुसार गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। इससे गोवंश को जहां परिवार आधारित संरक्षण मिला है, वहीं पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है।

भाषा आनन्द संतोष

संतोष