उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव थानों में खराब सीसीटीवी कैमरों की जांच कराएं: उच्च न्यायालय
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव थानों में खराब सीसीटीवी कैमरों की जांच कराएं: उच्च न्यायालय
लखनऊ, 11 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को राज्य भर के थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के लंबे समय से खराब पड़े होने की जांच करने का निर्देश दिया।
पीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अगर किसी भी मामले में सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित नहीं रखा जाता, तो जिलों के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उचित परिपत्र जारी करें।
पीठ ने मुख्य सचिव को इन सभी पहलुओं की गहन जांच करने और परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया नहीं तो उन्हें 23 फरवरी को अदालत में पेश होना होगा। न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने श्याम सुंदर अग्रहरि द्वारा दायर एक रिट याचिका पर चार फरवरी को यह आदेश दिया, जिसे बुधवार को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
याचिकाकर्ता के वकील शिवेंद्र शिवम सिंह राठौर ने बताया कि उनके 56 वर्षीय दिव्यांग मुवक्किल को सुलतानपुर जिले के मोतीगरपुर थाने ने दर्ज झूठे मामले में फंसाया गया था।
जिला न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत दे दी थी।
बाद में, पिछले साल छह सितंबर की रात को पुलिस ने उन्हें उनके घर से उठाया, थाने ले गयी और हवालात में उनकी पिटाई करने के बाद एक अन्य झूठे मामले में फंसा दिया।
याचिकाकर्ता ने सीसीटीवी फुटेज से सच्चाई का पता चलने के बाद झूठे और अवैध तरीके से मामला दर्ज किए जाने के आधार पर मामले को रद्द करने का अनुरोध किया था।
जब पीठ ने पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह को तलब किया, तो उन्होंने अपना निजी हलफनामा दाखिल कर सीसीटीवी फुटेज पेश करने में असमर्थता जताई क्योंकि मोतीगरपुर थाने के सीसीटीवी कैमरे एक जून, 2025 से काम नहीं कर रहे थे। पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही निर्देश जारी कर कहा था कि थानों के सीसीटीवी फुटेज को डेढ़ साल तक और किसी भी हालत में कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए लेकिन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने 20 जून, 2025 को एक परिपत्र जारी कर फुटेज को केवल ढाई महीने तक सुरक्षित रखने की समयसीमा तय की थी।
पीठ ने कहा, “पुलिस महानिदेशक का यह कृत्य उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।”
पीठ ने पाया कि इस मामले में पुलिस महानिदेशक के निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया क्योंकि सीसीटीवी कैमरे एक जून से नौ सितंबर, 2025 तक काम नहीं कर रहे थे।
अदालत ने इस अवधि के दौरान याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के मामले (छह सितंबर को) पर संज्ञान लिया था।
पीठ ने कैमरों की खराबी के कारण सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित न किए जाने की बार-बार की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर कैमरों के काम न करने की केवल एक घटना इस न्यायालय के समक्ष आई होती, तो इसे समझा जा सकता था लेकिन जब कोई घटना बार-बार हो रही है, तो इसे संयोग नहीं कहा जा सकता क्योंकि विचित्र बात यह है कि जब अदालतों को संबंधित थानों से सीसीटीवी फुटेज की आवश्यकता होती है, तभी पता चलता है कि कैमरे खराब हैं।”
भाषा सं जफर जितेंद्र
जितेंद्र

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