लखनऊ, 11 अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि एक समय था कि उत्तर प्रदेश माफियाओं का गढ़ बन गया था, लेकिन अब यह संतों और संन्यासियों का गढ़ माना जाता है।
राजनाथ सिंह ने शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर में जनकल्याण महासमिति के वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ की सरकारों के विकास कार्य की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि दोनों ने यहां के लिए जो किया है, वह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ”एक समय था कि उप्र माफियाओं का गढ़ था, लेकिन आज उप्र संतों और संन्यासियों का गढ़ हो गया है।”
सिंह ने कहा, ”एक समय उप्र को बीमारू प्रदेश कहा जाता था, अब कहीं भी चले जाइए तो लोग कहते हैं कि एक हद तक उप्र उत्तम प्रदेश बन गया है।”
रक्षा मंत्री ने कहा, ”दुनिया वैश्चिक संकट से गुजर रही है लेकिन इस दौर में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था भारत की है। यह हमारे लिए गौरव का विषय है।”
उन्होंने महिलाओं से मुखातिब होते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बारे में कहना चाहता हूं कि संसद-विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा और इसके लिए संसद का विशेष सत्र आयोजित होने जा रहा है।
उन्होंने कहा, ”देश में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इजराइल आदि देशों के युद्ध से दुनिया का कोई देश अछूता नहीं है, अमेरिका भी संकट में है लेकिन भारत ने इन चुनौतियों को स्वीकार किया है। हालांकि थोड़े समय के लिए कुछ संकट हो जाए, लेकिन देश की जनता को पूरी ताकत और संयम के साथ खड़े रहने की आवश्यकता है। अफवाह पर ध्यान न देने की जरूरत है।”
सिंह ने यह भी भरोसा दिया कि ”हमारी सरकार के रहते देश में कोई बड़ा संकट पैदा नहीं होगा। कोविड का जब हमने सामना कर लिया तो जो भी पश्चिम एशिया में चल रहा है उसका सामने करने को तैयार हैं। विश्व बैंक ने कहा कि भारत संकट का सामना करने में सक्षम है।”
लखनऊ के सांसद के रूप में यहां किये गये कार्यों और प्रस्तावित कार्यों की चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि ”लखनऊ की पहचान, उसकी तहजीब और गंगा जमुनी संस्कृति रही है। हालांकि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी विरासत को भूलते जा रहे हैं।”
उन्होंने हुसैनाबाद के संग्रहालय की चर्चा करते हुए कहा कि संग्रहालय के जरिये अवध के गौरव और मिली जुली संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का ऐतिहासिक कदम है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता ने कहा कि यह तमाम परिवर्तन उप्र की जनता के आशीर्वाद और ‘डबल इंजन’ सरकार के प्रयासों से हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ”किसी भी शहर की तरक्की के लिए इसके आधारभूत ढांचे का मजबूत होना बहुत जरूरी है और हमने इसके विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है। हालांकि मैं संतुष्ट नहीं हूं, अभी बहुत से काम करने हैं।”
रक्षा मंत्री ने पूर्व में लखनऊ की सड़कों की चर्चा करते हुए कहा कि पहले लखनऊ से बाहर निकलते ही सड़कें संकरी और जाम से भरी मिलती हैं लेकिन अब चार रास्तों का उच्चीकरण किया गया है और अब रास्ते चौड़े और सुरक्षित मिलेंगे। कुछ ही दिनों में लखनऊ-कानपुर सड़क का उद्घाटन होगा।
उन्होंने कहा कि लखनऊ की प्रगति के लिए आसपास के इलाकों का भी विकास बहुत जरूरी है क्योंकि जब तक आस पास का विकास नहीं होगा तो लखनऊ का विकास नहीं होगा।
सिंह ने लोगों को एक सड़क परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि लखनऊ में राजमार्ग बाराबंकी से शुरू होकर बहराइच तक 101 किलोमीटर लंबा चार लेन मार्ग बनेगा और इसकी सर्विस रोड भी बनेगी। उन्होंने कहा कि इस पर सात हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे और फायदा यह होगा कि बाराबंकी से ढाई घंटे में बहराइच पहुंचने वाला सफर सवा घंटे का हो जाएगा। यह राज्य राजधानी क्षेत्र का नया कॉरिडोर बनेगा जिससे रोजगार और विकास होगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि लखनऊ रक्षा के क्षेत्र में बढ़ चढ़कर योगदान देने के लिए तैयार है। अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण शुरू हो गया है और गर्व की बात है कि उसकी पहली खेप सेना को सौंप दी गई है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ रक्षा उपकरणों से जुड़े कई छोटे बड़े कारखाने स्थापित होने वाले हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको जमीन देने की सहमति दी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ”लखनऊ का विकास, बेहद सुनियोजित योजना के तहत चल रहा है। यह विकास की गंगा है जिसकी धारा में गरीब का, व्यापारी का, बुजुर्ग का और नौजवान का, सबका कल्याण समाया है। हमारा निरंतर प्रयास रहेगा कि लखनऊ वासियों का रहन-सहन सुख-सुविधाओं से सम्पन्न और परिपूर्ण रहे।”
उन्होंने कहा, ”विकास वह होता है जो विरासत को भी साथ में रखे, आपके सपने को भी साथ में रखे और आपके अपनों को भी अपने साथ रखे। आज हम जिसकी शुरुआत कर रहे हैं वह इसी का नतीजा है।”
भाषा
आनन्द रवि कांत