CM Pushkar Singh || IMAGE- ANI News File
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित “रजत जयंती समारोह” में भाग लिया। (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) यह समारोह उत्तराखंड वन विकास निगम के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि कुमाऊं मंडल में निगम का एक नया कार्यालय भी खोला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए वन क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन के लिए छत्ते लगाने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत करें। एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने निगम के कर्मचारियों के उन बच्चों को भी सम्मानित किया जिन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में 75% से अधिक अंक प्राप्त किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विकास निगम न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था में बल्कि इसकी पारिस्थितिकी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निगम वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन उत्पादों के सतत उपयोग, आरक्षित वन क्षेत्रों में खनन कार्यों और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। यह वन उत्पादों और प्रमाणित लकड़ी की आपूर्ति भी सुनिश्चित करता है। (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) उन्होंने आगे कहा कि निगम केवल आर्थिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सूखे, मृत और उखड़े हुए पेड़ों को हटाकर नए वन क्षेत्रों के विकास में भी योगदान देता है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन पहलों के माध्यम से यह युवाओं और छात्रों में पर्यावरण जागरूकता फैला रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने “हिमकास्थ” मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया और बताया कि इससे निगम से लकड़ी की बिक्री में आसानी होगी और वन उत्पादों की ऑनलाइन नीलामी संभव हो सकेगी। उन्होंने कहा कि निगम की आधुनिक ई-नीलामी प्रणाली और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं ने इस क्षेत्र में व्यापार करने में सुगमता को मजबूत किया है, जो दोहरी इंजन वाली सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड वन विकास निगम ने अपने 25 वर्षों के सफर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) पिछले वर्ष इसने 167 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सही नीतियों और इरादे के साथ, संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग विकास को गति देने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि घने जंगल, ऊंचे-ऊंचे पर्वत, विशाल हिमनद, पवित्र नदियाँ और समृद्ध जैव विविधता देवभूमि उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर हैं । इस प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि ये प्राकृतिक संसाधन न केवल आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का अभिन्न अंग भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार “अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी” के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आगे बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक स्तर पर “पर्यावरण के लिए जीवनशैली” का आह्वान किया है, जो केवल एक नारा नहीं बल्कि धरती माता की रक्षा का एक सशक्त मंत्र है। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से जंगल सफारी या धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान कूड़ा न फैलाने की अपील की, और कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भौतिक विकास ने जीवनशैली में बदलाव लाया है, लेकिन प्रकृति, पर्यावरण और जंगलों की उपेक्षा करने से यह विकास अधूरा रह जाएगा। इसलिए, विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए वन संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वन संसाधनों को लोगों की आजीविका से जोड़ने के लिए कई पहल की जा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में वन विकास निगम ने कुल 627 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।
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