क्या जिम में सिर्फ चॉकलेट सूंघना ही आपके व्यायाम के लिए लाभदायक साबित हो सकता है?

क्या जिम में सिर्फ चॉकलेट सूंघना ही आपके व्यायाम के लिए लाभदायक साबित हो सकता है?

क्या जिम में सिर्फ चॉकलेट सूंघना ही आपके व्यायाम के लिए लाभदायक साबित हो सकता है?
Modified Date: July 15, 2026 / 03:52 pm IST
Published Date: July 15, 2026 3:52 pm IST

(हंटर बेनेट, एडिलेड विश्वविद्यालय)

एडिलेड, 15 जुलाई (द कन्वरसेशन) सिर्फ चॉकलेट की खुशबू सूंघने से भी जिम में आपके व्यायाम का स्तर बेहतर हो सकता है। हाल ही में आए एक शोध में किए गए इस दावे ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं।

यानि न चॉकलेट खानी है, न कैलोरी लेनी है, सिर्फ उसकी खुशबू सूंघनी है।

शोध में दावा किया गया, ‘‘चॉकलेट की खुशबू सूंघने से खाली पेट होने के बाद भी ‘लेग-डे’ (पैरों की एक्सरसाइज) करना आसान लग सकता है।’’

हालांकि, यह भी कहा गया कि यह दिमाग और शरीर (साइकोबायोलॉजी) से जुड़ा असर हो सकता है।

लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या यह शोध भरोसेमंद है? एक व्यायाम विज्ञानी होने के नाते मैंने इस शोध का विश्लेषण किया।

शोधकर्ताओं ने क्या किया :

इस शोध में 23 युवाओं को शामिल किया गया। ये सभी पिछले दो साल से हर हफ्ते कम-से-कम दो बार जिम में ‘रेसिस्टेंस ट्रेनिंग’ कर रहे थे। वे पेशेवर एथलीट नहीं थे, लेकिन नियमित रूप से जिम जाते थे।

रेजिस्टेंस ट्रेनिंग वह व्यायाम होता है जिसमें मांसपेशियां किसी वजन या दबाव को बर्दाश्त करती हैं। जैसे – वजन उठाना, जिम में मशीन का इस्तेमाल करना या अपने शरीर के वजन के अनुसार व्यायाम करना।

इस शोध में प्रतिभागियों ने ‘लेग एक्सटेंशन’ मशीन का इस्तेमाल किया। इसमें व्यक्ति कुर्सी पर बैठकर पैरों से वजन को ऊपर की ओर धकेलता है।

शोध के अनुसार हर प्रतिभागी तीन अलग-अलग दिनों में प्रयोगशाला आया। हर बार वह लगभग 10 घंटे तक खाली पेट रहा। हर दौरे पर उन्हें 30 सेकंड तक तीन में से किसी एक चीज की खुशबू सूंघाई गई। यह क्रम हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग रखा गया – 90 प्रतिशत कोको वाली डार्क चॉकलेट, 60 प्रतिशत कोको वाली मिल्क चॉकलेट या सिर्फ सादा पानी (जिसे तुलना के लिए रखा गया था)।

इसके बाद उन्होंने ‘लेग एक्सटेंशन’ मशीन पर अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम किया। उन्हें ऐसा वजन दिया गया जो उनकी अधिकतम क्षमता का लगभग 80 प्रतिशत था। उन्हें 10-10 रैप (दोहराव) वाले जितने सेट कर सकते थे, उतने करने थे। हर सेट के बीच वे फिर से उसी जार की खुशबू सूंघते थे। वे तब तक व्यायाम करते रहे, जब तक उन्हें लगा कि अब अगला सेट पूरा नहीं कर पाएंगे।

शोध में क्या पता चला :

जिन लोगों ने डार्क चॉकलेट की खुशबू सूंघी, उन्होंने औसतन 18 रैप ज्यादा किए। जिन्होंने मिल्क चॉकलेट सूंघी, उन्होंने लगभग 9 रैप ज्यादा किए। यानी डार्क चॉकलेट की खुशबू से प्रदर्शन में 25 प्रतिशत से भी ज्यादा सुधार देखने को मिला, जो काफी बड़ा असर माना जाता है।

तुलना के लिए, दूसरे शोध बताते हैं कि कैफीन लेने से आम तौर पर हर सेट में सिर्फ लगभग एक अतिरिक्त रैप ही बढ़ता है। इसलिए इस शोध का परिणाम काफी बड़ा माना गया।

भूख पर क्या असर पड़ा :

प्रतिभागियों से यह भी पूछा गया कि खुशबू सूंघने के बाद उन्हें कितनी भूख महसूस हुई। डार्क चॉकलेट की खुशबू से उन्हें कम भूख लगी। मिल्क चॉकलेट से भूख में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। हालांकि अधिकांश लोगों को मिल्क चॉकलेट की खुशबू, डार्क चॉकलेट और पानी दोनों से ज्यादा अच्छी लगी।

शोधकर्ताओं का क्या मानना है :

शोधकर्ताओं का कहना है कि जब हमें भूख लगती है, तो हमारा ध्यान बंट जाता है, जिससे जिम में व्यायाम का स्तर थोड़ा कम हो सकता है।

डार्क चॉकलेट की खुशबू शायद दिमाग को यह एहसास दिलाती है कि पेट कुछ हद तक भरा हुआ है, जिससे व्यक्ति ज्यादा देर तक और बेहतर तरीके से व्यायाम कर पाता है।

डार्क चॉकलेट का असर मिल्क चॉकलेट से ज्यादा क्यों हुआ, इसका सही कारण अभी साफ नहीं है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि डार्क चॉकलेट की तेज और गहरी खुशबू लोगों के लिए ज्यादा परिचित रही होगी, इसलिए उससे उन्हें पेट भरा होने जैसा एहसास हुआ।

(द कन्वरसेशन) शफीक नरेश

नरेश


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