सरकार ने लौह अयस्क को प्रमुख बुनियादी उद्योग सूचकांक में जोड़ा, क्षेत्रों की संख्या बढ़कर नौ हुई

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सरकार ने लौह अयस्क को प्रमुख बुनियादी उद्योग सूचकांक में जोड़ा, क्षेत्रों की संख्या बढ़कर नौ हुई

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 06:33 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 06:33 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) सरकार ने लौह अयस्क को प्रमुख बुनियादी उद्योगों की सूची में शामिल किया है। इस कदम से अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का और बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही प्रमुख बुनियादी उद्योगों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है।

वर्तमान में सरकार आठ प्रमुख क्षेत्रों कच्चा तेल, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट, बिजली, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, तैयार इस्पात और कोयला के प्रदर्शन का मासिक आधार पर आकलन करती है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान में कहा, ‘औद्योगिक उत्पादन में लौह अयस्क के व्यापक उपयोग और औद्योगिक विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए संशोधित बुनियादी उद्योग सूचकांक (आईसीआई) श्रृंखला में लौह अयस्क को शामिल किया गया है।’

मंत्रालय ने बताया कि नौ प्रमुख क्षेत्रों के आंकड़ों वाली नई श्रृंखला, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा, इस साल 20 जुलाई को जारी की जाएगी।

संशोधित श्रृंखला मौजूदा बुनियादी उद्योग सूचकांक (आईसीआई) श्रृंखला की जगह लेगी, जिसका आधार वर्ष 2011-12 है।

मंत्रालय ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के साथ समानता बनाए रखने के लिए संशोधित आईसीआई श्रृंखला में इस्पात सूचकांक तैयार करने के लिए सकल उत्पादन आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले आईसीआई (2011-12) श्रृंखला में शुद्ध उत्पादन आंकड़ों का उपयोग किया जाता था।

मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, कोयला क्षेत्र में भी संशोधित श्रृंखला में केवल कच्चे कोयले को ही रखा गया है। दोहरी गणना से बचने के लिए मध्यम श्रेणी के कोयले (कोल मिडलिंग्स) और धुले हुए कोयले को इस सूची से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि ये दोनों कच्चे कोयले से ही प्राप्त होते हैं।

सरकार ने वर्ष 2011 में प्राकृतिक गैस और उर्वरक को दो नए क्षेत्रों के रूप में प्रमुख बुनियादी उद्योगों में शामिल किया था।

मई में आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर सात महीने के निचले स्तर 0.5 प्रतिशत पर आ गई थी। कोयला, कच्चे तेल और रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में गिरावट के कारण इसमें कमी आई थी।

भाषा योगेश रमण

रमण