चीन में अकादमिक कदाचार पर बड़ी कार्रवाई, चार शीर्ष प्रोफेसर पद से हटाए गए

चीन में अकादमिक कदाचार पर बड़ी कार्रवाई, चार शीर्ष प्रोफेसर पद से हटाए गए

चीन में अकादमिक कदाचार पर बड़ी कार्रवाई, चार शीर्ष प्रोफेसर पद से हटाए गए
Modified Date: September 3, 2026 / 04:41 pm IST
Published Date: September 3, 2026 4:41 pm IST

(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, तीन सितंबर (भाषा) चीन ने अकादमिक कदाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक कार्रवाई शुरू करते हुए चार प्रमुख शिक्षाविदों को उनके पद से हटा दिया है और विश्वविद्यालयों तथा अस्पतालों के 40 से अधिक शोधकर्ताओं के खिलाफ जांच शुरू की है।

हांगकांग से प्रकाशित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने बृहस्पतिवार को खबर दी कि चीन के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान फाउंडेशन (एनएसएफसी) ने 26 अगस्त को देशभर के विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में अकादमिक कदाचार के 31 नए मामलों का विवरण जारी किया। इन मामलों में 40 से अधिक शोधकर्ता शामिल हैं।

एनएसएफसी की यह घोषणा चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा अकादमिक कदाचार के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आह्वान करने के करीब दो महीने बाद की गयी है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में चार प्रमुख शिक्षाविदों को अपने पद गंवाने पड़े। हाई-प्रोफाइल ब्लॉगर और पीएचडी की पढ़ाई बीच में छोड़ चुके छात्र गेंग ने अप्रैल में सार्वजनिक रूप से इन शिक्षाविदों के नाम उजागर किए थे और उनके शोध में कथित कदाचार की ओर ध्यान दिलाया था।

इन चारों शिक्षाविदों को राष्ट्रीय उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिकों के लिए राष्ट्रीय विज्ञान कोष से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान अक्सर चीन की शीर्ष विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अकादमियों में प्रवेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इनमें से तीन शिक्षाविद अपने-अपने संस्थान में डीन या एसोसिएट डीन रह चुके थे।

गेंग द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए खुलासों के बाद एनएसएफसी ने अकादमिक कदाचार की अब तक की सबसे बड़ी जांच शुरू की।

अगस्त में जारी अपनी सूचना में फाउंडेशन ने चारों शिक्षाविदों के नाम का उल्लेख करते हुए उनकी वित्तीय सहायता और उपाधियां रद्द कर दीं। साथ ही, उन्हें पहले दिए गए एक करोड़ युआन (लगभग 1.49 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक के अनुदान वापस करने का आदेश दिया गया और तीन से सात साल तक नए अनुदान के लिए आवेदन करने पर रोक लगा दी गई।

‘पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के शोध समुदाय में इस कार्रवाई को व्यापक रूप से किसी शिक्षाविद के करियर के लिए ‘‘मौत की सजा’’ के तौर पर देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति शी ने इससे पहले राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पुरस्कार, चीनी विज्ञान अकादमी, चीनी इंजीनियरिंग अकादमी और चीन एसोसिएशन फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अकादमिक कदाचार से निपटने के लिए ‘‘और कड़े मानकों’’ तथा ‘‘और ठोस उपायों’’ की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने ‘‘स्वच्छ और ईमानदार शोध परिवेशी तंत्र’’ विकसित करने का भी आह्वान किया था।

भाषा

मनीषा सुरेश

सुरेश


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