कांगो में इबोला के पुष्ट मामले 282 पहुंचे, स्वस्थ हुए स्वास्थ्यकर्मियों की कहानियों से बढ़ी उम्मीद
कांगो में इबोला के पुष्ट मामले 282 पहुंचे, स्वस्थ हुए स्वास्थ्यकर्मियों की कहानियों से बढ़ी उम्मीद
बुनिया (कांगो), दो जून (एपी) कांगो में फैल रहे इबोला प्रकोप के बीच संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 282 हो गई है।
इस बीच, बीमारी को मात देकर स्वस्थ हुए स्वास्थ्यकर्मियों की प्रेरक कहानियां सामने आने से लोगों में उम्मीद जगी है। एक नर्स ने इबोला से उबरने को ‘‘अवर्णनीय खुशी’’ बताया।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रकोप का केंद्र पूर्वी इटुरी प्रांत है, जहां 264 मामलों की पुष्टि हुई है। देश में बुंडिबुग्यो वायरस से जुड़े 1,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। प्रकोप शुरू होने के कई सप्ताह बाद इस वायरस की पुष्टि हुई थी। इस वायरस के उपचार के लिए अभी कोई स्वीकृत दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकोप से कांगो में 42 और पड़ोसी युगांडा में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण कांगो के पूर्वी हिस्से के तीन प्रांतों के 22 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने संसाधनों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक सामग्री की नई खेप पहुंचने जैसी प्रगति को रेखांकित किया है।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में प्रकोप को नियंत्रित करने की प्रमुख चुनौतियों में मामलों की शीघ्र पहचान, संक्रमितों को तुरंत अलग करना, संपर्कों का प्रभावी पता लगाना, सुरक्षित एवं सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना तथा स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण रोकथाम उपायों को मजबूत करना शामिल है।
इस बीच, ‘कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन्स’ (सीईपीआई) ने सोमवार को बुंडिबुग्यो वायरस के लिए विकसित किए जा रहे तीन प्रायोगिक टीकों के विकास में तेजी लाने के लिए 6.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की सहायता देने की घोषणा की। ये टीके ‘इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव’, ‘मॉडर्ना’ और ‘ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय’ द्वारा विकसित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सप्ताहांत में बुनिया में नए इबोला उपचार केंद्र के उद्घाटन के दौरान बीमारी से स्वस्थ हुए पांच स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया।
नर्स बराका बुलामबुलु ने बताया कि उनकी अंतिम जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वह बेहद खुश हुईं। उन्होंने कहा, ‘‘इस बीमारी से जीवित बाहर निकलना अवर्णनीय खुशी है।’’
एक अन्य नर्स एजो एतियेन ने बताया कि मरीजों की देखभाल के दौरान एक बार उन्हें चक्कर आए और कुछ ही देर बाद उल्टियां होने लगीं, तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह वायरस संक्रमित या मृत व्यक्तियों के शारीरिक द्रवों के निकट संपर्क से फैलता है। अब तक उपचार मुख्य रूप से मरीजों के लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित रहा है।
घेब्रेयेसस ने स्वस्थ हुए स्वास्थ्य कर्मियों से कहा, ‘‘आपका साहस लोगों को उम्मीद देता है और आपकी जीवंत कहानी इस बात का प्रमाण है कि इस प्रकोप को रोका जा सकता है।’’
युगांडा में इबोला के नौ मामले सामने आए हैं। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उसने कांगो के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है। हालांकि कांगो और युगांडा में पहले भी इबोला के 20 से अधिक प्रकोप हो चुके हैं, लेकिन बुंडिबुग्यो वायरस अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।
क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट से संबद्ध विद्रोही संगठन ‘एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेज’ (एडीएफ) और जातीय मिलिशिया समूहों के हमलों ने भी राहत एवं नियंत्रण प्रयासों को प्रभावित किया है।
कांगो के उत्तर किवु प्रांत का बेनी क्षेत्र भी इबोला प्रकोप से प्रभावित है।
इसी तरह, दक्षिण की ओर स्थित उत्तर किवु और दक्षिण किवु प्रांतों में भी संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं, जहां रवांडा समर्थित एम23 विद्रोही समूह का गोमा और बुकावु सहित कई प्रमुख शहरों पर नियंत्रण है।
एपी मनीषा रंजन
रंजन

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