(अदिति खन्ना)
लंदन, 30 जून (भाषा) स्कॉटलैंड स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने ग्लासगो के सेंट्रल गुरुद्वारा में संरक्षित लगभग 300 वर्ष पुराने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की एक प्राचीन पांडुलिपि का श्रद्धालुओं द्वारा दर्शन के लिए मंगलवार को एक प्रस्ताव साझा किया।
महावाणिज्य दूतावास स्कॉटलैंड की टीम ने एडिनबरा और ग्लासगो के गुरुद्वारा प्रतिनिधियों, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के अधिकारियों तथा गैर-लाभकारी संस्था सिख संजोग की त्रिशना सिंह के साथ एक समन्वय बैठक में भाग लिया, जिसका उद्देश्य इस “दर्शन” को सुगम बनाना था।
यह पवित्र पांडुलिपि वर्ष 2020 में विश्वविद्यालय के अभिलेखागार में मिली थी।
महावाणिज्य दूतावास स्कॉटलैंड ने एक बयान में कहा कि यह पांडुलिपि पंजाब के महाराजा खड़क सिंह की थी और इसका व्यापक संरक्षण एवं पुनर्संरक्षण किया गया है।
बयान में कहा गया, “यह हमारी साझा विरासत के संरक्षण और उत्सव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
माना जाता है कि यह ब्रिटेन में अपनी तरह की सबसे पुरानी पांडुलिपियों में से एक है। यह गुरु ग्रंथ साहिब की तीन पांडुलिपियों में शामिल है, जो एडिनबरा विश्वविद्यालय के पास मौजूद हैं। यह पांडुलिपि 1848 में पंजाब के दुलेवाला किले पर कब्जे के दौरान वहां से ले जाई गई थी और बाद में ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर में इसे ब्रिटेन लाया गया।
त्रिशना सिंह ने बताया कि सिख शोधकर्ताओं को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इन पांडुलिपियों का उल्लेख मिला, जिसके बाद समुदाय ने इन्हें देखने का अवसर प्राप्त किया।
भाषा अमित पवनेश
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