Rahul Gandhi Parliament Speech Live || Image- Sansad TV File
नई दिल्ली: आज संसद के बजट सत्र का 11वां दिन है। पिछले दिनों कांग्रेस ने आरोप लगाया, (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) लोकसभा स्पीकर ने उन्हें बोलने का मौक़ा नहीं दिया तो वही आज राहुल गांधी केंद्र की सरकार पर अलग-अलग मुद्दों पर जमकर निशाना साध रहे हैं।
लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा, “हम जो कुछ भी सामने रखते हैं, वह हमारे लोग हैं। उनका ज्ञान, उनके कार्य, उनकी पसंद-नापसंद, उनकी कल्पनाशीलता और उनका भय। 21वीं सदी में अचानक इसका महत्व बढ़ गया है। 20वीं सदी में इसका कोई महत्व नहीं था। मुझे याद है कि बहुत से लोग कहते थे कि जनसंख्या बोझ है, जनसंख्या आपदा है। नहीं, जनसंख्या सबसे बड़ी संपत्ति है जो आपके पास हो सकती है। यह एक ताकत है। लेकिन यह ताकत तभी है जब आप इस आंकड़े को पहचानें।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर भारत-राष्ट्रपति गठबंधन राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बातचीत कर रहा होता, तो मैं आपको बताता कि हम क्या कहते। सबसे पहली बात जो हम कहते, वह यह थी कि राष्ट्रपति ट्रम्प, इस समीकरण में सबसे महत्वपूर्ण चीज भारतीय आंकड़े हैं।” राहुल गांधी ने कहा, “मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं, अमेरिका और चीन के बीच मुकाबले में सबसे मूल्यवान संपत्ति भारतीय डेटा है। अगर अमेरिकी महाशक्ति बने रहना चाहते हैं, और अगर अमेरिकी अपने डॉलर की रक्षा करना चाहते हैं, तो इसकी कुंजी भारतीय डेटा है।”
#WATCH | In the Parliament, Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, “… What we put on the table is our people. Their wisdom, what they do, their likes, dislikes, their imagination, and their fear. This has suddenly, in the 21st century, got value. In the 20th century,… pic.twitter.com/vfRcGN38H8
— ANI (@ANI) February 11, 2026
#WATCH | In the Parliament, Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, “If the INDIA alliance was negotiating with President Trump. I will tell you what we would say. The first thing we would say is President Trump, the most important thing in this equation is Indian data.… pic.twitter.com/Y3xUqIVgEO
— ANI (@ANI) February 11, 2026
#WATCH | In the Parliament, Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, “If the INDIA alliance was negotiating with President Trump. I will tell you what we would say. The first thing we would say is President Trump, the most important thing in this equation is Indian data.… pic.twitter.com/Y3xUqIVgEO
— ANI (@ANI) February 11, 2026
राहुल गाँधी से पहले राज्यसभा में कांग्रेस की तरफ से सवाल पूछे गये और कई गंभीर आरोप भी लगाए गए। रास सांसद अशोक सिंह ने कहा, “भारत-अमेरिका डील मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) एक तरफ जहां राज्य का सोयाबीन किसान लागत नहीं निकाल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार अमेरिका से सोयाबीन तेल और अनाज आयात करने के लिए दरवाजे खोल रही है।
2025-26 के लिए सरकार ने सोयाबीन MSP 5,300 रुपए तय किया था लेकिन किसान अपनी फसल तय MSP से काफी कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। ये समझौता किसानों के साथ धोखा है। अमेरिका से सस्ता सोयाबीन तेल भारत में आने के बाद यहां का किसान तबाह हो जाएगा। मेरी मांग है कि अमेरिका से सोयाबीन के आयात पर तुरंत रोक लगाई जाए।”
इस पूरे मामले पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत ने व्यापार समझौतों में हमेशा उन क्षेत्रों को लेकर ‘‘स्पष्ट सोच’’ रखी है जो देश के लिए ‘‘बेहद’’ संवेदनशील हैं और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में ऐसे सभी प्रमुख क्षेत्रों की पूरी तरह रक्षा की गई है। (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त बयान को कानूनी समझौते में बदलने पर काम कर रहे हैं जिसे मार्च के अंत तक अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।
अग्रवाल ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ भारत ने हमेशा सभी समझौतों पर स्पष्ट सोच के साथ बातचीत की है। जो भी क्षेत्र भारत के लिए बेहद संवेदनशील हैं, जहां हमें लगता है कि हमारे किसान, मछुआरे, दुग्ध क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, वहां हमने अपने साझेदार देशों को साफ बता दिया है कि भारत ऐसे मामलों में बाजार नहीं खोल सकता या पहुंच नहीं दे सकता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ अगर आप पिछले एक साल में किए गए सभी समझौतों को देखें। हमने पांच व्यापार समझौते किए हैं। सभी में संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है। अमेरिका के साथ भी सभी प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) जहां थोड़ी संवेदनशीलता थी, वहां हमने शुल्क दर ‘कोटा’ व्यवस्था का इस्तेमाल किया ताकि बाजार तक पहुंच सीमित रहे और हमारे किसानों पर असर न पड़े।’’
भारत-अमेरिका डील मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए मुसीबत बन गई है।
एक तरफ जहां राज्य का सोयाबीन किसान लागत नहीं निकाल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार अमेरिका से सोयाबीन तेल और अनाज आयात करने के लिए दरवाजे खोल रही है।
2025-26 के लिए सरकार ने सोयाबीन MSP 5,300 रुपए तय… pic.twitter.com/MJmXC6q1xH
— Congress (@INCIndia) February 11, 2026
इस महीने की शुरुआत में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं दुग्ध उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा है। इन वस्तुओं पर अमेरिका को कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है। ये उत्पाद संवेदनशील माने जाते हैं क्योंकि इनका सीधा संबंध देश के छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका से है। अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भी भारत ने ऐसे उत्पादों पर आयात शुल्क में कोई रियायत नहीं दी है। हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ एफटीए को अंतिम रूप दिया है।
कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियां जैसे पशुपालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनसे 50 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में जहां कृषि अत्यधिक मशीनीकृत और कॉरपोरेट आधारित है, वहीं भारत में यह करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रश्न है। भारतीय कृषि क्षेत्र को वर्तमान में घरेलू किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए मध्यम से उच्च शुल्क और विभिन्न नियामकीय उपायों के माध्यम से संरक्षण प्रदान किया गया है।
वर्ष 2024 में अमेरिका का भारत को कृषि निर्यात 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें प्रमुख निर्यातों में छिलके सहित बादाम (86.8 करोड़ डॉलर), पिस्ता (12.1 करोड़ डॉलर), सेब (2.1 करोड़ डॉलर) और एथनॉल यानी एथिल अल्कोहल (26.6 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) अग्रवाल ‘बायोफैच’ 2026 प्रदर्शनी में हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जहां 100 से अधिक भारतीय प्रदर्शक और करीब 20 राज्य अपने जैविक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। यूरोपीय संघ इन उत्पादों का एक बड़ा बाजार माना जाता है।
उन्होंने कहा, “दल इस पर काम कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि मार्च तक इसे (अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को) औपचारिक रूप दे दिया जाएगा।” श्रम-प्रधान क्षेत्रों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बढ़त देगा, क्योंकि अमेरिकी बाजार में उन देशों पर भारत से अधिक शुल्क लगाया जा रहा है।
भारत पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि चीन के लिए यह 35 प्रतिशत और वियतनाम के लिए 20 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, “चूंकि अमेरिका श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए एक मजबूत बाजार रहा है, इसलिए इस अंतरिम समझौते से हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) वे बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे।” कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्र पहले 50 प्रतिशत के भारी शुल्क से प्रभावित थे। अब अमेरिकी प्रशासन ने 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटा दिया है और जवाबी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है।