क्या शादी से कैंसर से बचाव होता है? इससे सबसे अधिक लाभ किसे होता है?

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क्या शादी से कैंसर से बचाव होता है? इससे सबसे अधिक लाभ किसे होता है?

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 05:27 PM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 05:27 PM IST

(जस्टिन स्टेबिंग द्वारा, एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय)

कैंब्रिज, 12 अप्रैल (द कन्वरसेशन) शादी का एक ऐसा प्रभाव भी हो सकता है जिसका जिक्र कोई भी शादी के वचनों में नहीं करता। इससे जुड़े एक अध्ययन में कहा गया है कि जिन लोगों की शादी हो चुकी है, उनमें कैंसर होने की संभावना उन लोगों की तुलना में कम होती है जिन्होंने कभी शादी नहीं की है।

यह एक नए बड़े अध्ययन का चौंकाने वाला निष्कर्ष है जिसने इस बारे में दिलचस्प सवाल खड़े किए हैं कि आखिर जीवनभर हमें वास्तव में स्वस्थ बनाए रखने वाली चीजें क्या हैं। यदि आंकड़ों में शादी को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है, तो असली सवाल यह उठता है कि इसका कारण क्या है-क्या यह पति-पत्नी के बीच का प्यार है, विवाह का कानूनी बंधन है, या फिर इसके पीछे कोई और गहरा सामाजिक या जीवनशैली से जुड़ा कारण है।

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 12 राज्यों की बड़ी आबादी के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें 40 लाख से अधिक वयस्क शामिल थे, ताकि व्यापक स्तर पर कैंसर के मामलों और उससे जुड़े रुझानों को समझा जा सके।

उन्होंने 2015 और 2022 के बीच 30 वर्ष की आयु के बाद निदान किए गए कैंसर पर ध्यान केंद्रित किया – यह एक आधुनिक तस्वीर है जो ऐसे युग में ली गई है जब समलैंगिक विवाह पूरे देश में कानूनी है, इसलिए विवाह में पहले से कहीं अधिक लोग शामिल हैं।

सभी लोग दो समूहों में बंटे हुए थे: एक वे लोग जो विवाहित थे या कभी विवाहित रह चुके थे, जिनमें तलाकशुदा और विधवाएं भी शामिल थीं, और दूसरे वे लोग जिन्होंने कभी विवाह नहीं किया। लगभग हर पांच में से एक वयस्क इस ‘‘कभी शादी न करने वाले’’ समूह में शामिल पाया गया, जिसकी सेहत को पारंपरिक परिवार-केंद्रित शोध में अक्सर नजरअंदाज किया गया है।

जब शोधकर्ताओं ने आंकड़ों की तुलना की, तो अंतर को नजरअंदाज करना असंभव था। जिन पुरुषों ने कभी शादी नहीं की थी, उनमें शादी कर चुके पुरुषों की तुलना में कैंसर होने की संभावना लगभग 70 प्रतिशत अधिक थी, जबकि जिन महिलाओं ने कभी शादी नहीं की थी, उनमें शादी कर चुकी महिलाओं की तुलना में कैंसर होने की संभावना लगभग 85 प्रतिशत अधिक थी।

महिलाओं को अधिक लाभ

यह अंतिम आंकड़ा विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि पहले के कई अध्ययनों में यह कहा गया था कि पुरुषों को महिलाओं की तुलना में विवाह से अधिक फायदा होता है। यहां, महिलाओं को कम से कम उतना ही, या उससे भी अधिक लाभ होता प्रतीत होता है।

और उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये अंतर और भी बढ़ गए, खासकर 50 साल की उम्र के बाद, जब दशकों की आदतों – धूम्रपान, खानपान, व्यायाम, चिकित्सा जांच, या इनकी कमी के परिणाम आखिरकार सामने आने लगे।

हर तरह के कैंसर के लिए यह अंतर एक जैसा नहीं था तथा यहीं से कहानी और भी अधिक खुलासा करने वाली बन जाती है।

पुरुषों में गुदा कैंसर और महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर – ये दोनों बीमारियां यौन संचारित ‘ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (एचपीवी) संक्रमण से गहराई से जुड़ी हुई हैं –इन मामलों में अंतर बहुत बड़ा पाया गया। अविवाहित पुरुषों में विवाहित पुरुषों की तुलना में गुदा कैंसर की दर लगभग पांच गुना अधिक थी।

अविवाहित महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की दर लगभग तीन गुना अधिक थी। ये वे कैंसर हैं जिनके लिए निवारक उपाय पहले से ही मौजूद हैं: एचपीवी टीकाकरण और प्रारंभिक चरण में ही कैंसर-पूर्व बदलावों का पता लगाने के लिए नियमित जांच।

अध्ययन के लेखकों का मानना है कि विवाहित होने से यह संभावना बढ़ जाती है कि किसी व्यक्ति को नियमित जांच के लिए जाने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि उसे अधिक स्थिर स्वास्थ्य सेवाएं और बीमा उपलब्ध हो सके।

असली सवाल यह है कि क्या विवाह लोगों को अधिक स्वस्थ बनाता है, या फिर पहले से ही अधिक स्वस्थ, संपन्न और बेहतर सहारा पाने वाले लोग ही शादी करने की अधिक संभावना रखते हैं।

गंभीर मानसिक बीमारियों, नशे की लत, दीर्घकालिक रोगों या गरीबी से जूझ रहे लोगों के विवाह करने की संभावना कम हो सकती है, और यही परिस्थितियां कैंसर के अधिक जोखिम से भी जुड़ी होती हैं।

यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण बात की ओर इशारा करता है। जो लोग विवाहित हैं या रह चुके हैं, उनमें डॉक्टर से मिलने के लिए प्रोत्साहित करने, वित्तीय संसाधनों और स्वास्थ्य बीमा को साझा करने की संभावना अधिक होती है, और उनमें अत्यधिक धूम्रपान करने या चिकित्सा देखभाल से बचने की संभावना कम होती है।

कई वर्षों में, ये छोटे-छोटे अंतर मिलकर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे लोगों के जोखिम तय होते हैं और यह प्रभावित होता है कि अंततः कौन से कैंसर विकसित होते हैं – और कौन से कभी नहीं होते।

यदि आपने कभी शादी नहीं की है, तो यह सब आपके व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं डालता।

यह अध्ययन शादी की महिमा गाने के बजाय इस बात पर जोर देता है कि इंसान का स्वास्थ्य सिर्फ उसके जीन या किस्मत पर निर्भर नहीं होता, बल्कि समाज, रिश्तों और जीवन की परिस्थितियों जैसे व्यापक सामाजिक ढांचे भी उसे गहराई से प्रभावित करते हैं।

हमारे जीवन में मौजूद वे लोग, जो हमारी सेहत का ख्याल रखते हैं, समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करते हैं और इलाज कराने में सहयोग करते हैं, उनका असर लंबे समय बाद भी हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

जनस्वास्थ्य और नीति-निर्माण के लिए असली चुनौती यह है कि संबंध, स्थिरता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचाए जाएं।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल