अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल; 21 घंटे की चर्चा से नहीं निकला कोई नतीजा

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल; 21 घंटे की चर्चा से नहीं निकला कोई नतीजा

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 06:47 PM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 06:47 PM IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की ऐतिहासिक वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता नहीं हो सका, जिससे दो सप्ताह के लिए लागू नाजुक युद्धविराम का भविष्य अब अधर में है। दोनों पक्ष वार्ता विफल होने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

इस्लामाबाद में हुई वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका द्वारा अपना ‘अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव’ प्रस्तुत किए जाने के बावजूद ईरानी पक्ष ने युद्ध समाप्ति के लिए वाशिंगटन की शर्तों को स्वीकार नहीं किया।

वेंस ने कहा कि शांति समझौता नहीं होने का मुख्य कारण तेहरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ना था।

ईरानी दल के प्रमुख और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि यह अमेरिका को तय करना है कि वह ‘हमारा विश्वास जीत सकता है या नहीं।’

ईरानी विदेश मंत्रालय ने विस्तार से बताए बिना कहा कि अमेरिकी पक्ष ने ‘अत्यधिक’ और ‘अवैध मांगें’ रखीं।

समझौता नहीं होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले जाने की संभावना धूमिल हो गई है। यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करेगा या नहीं।

पाकिस्तान की राजधानी से रवाना होने से पहले एक संवाददाता सम्मेलन में वेंस ने कहा, ‘‘हम पिछले 21 घंटे से बातचीत कर रहे हैं। अच्छी खबर यह है कि हमने ईरानियों के साथ कई महत्वपूर्ण चर्चाएं की हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं और मुझे लगता है कि यह अमेरिका के लिए जितनी बुरी खबर है उससे कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें उनसे यह स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहिए कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे और न ही ऐसे उपकरण हासिल करेंगे जिनसे वे जल्दी से परमाणु हथियार बना सकें।’’

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में वेंस ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘मुख्य लक्ष्य’ ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

उन्होंने कहा, ‘‘यही अमेरिका के राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य है। और इन वार्ताओं के माध्यम से हमने यही हासिल करने का प्रयास किया है।’’

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने ईरानी पक्ष को अपना ‘अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार कर लें।’

ईरानी मीडिया ने बताया कि वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और ‘फ्रीज’ की गईं ईरानी परिसंपत्तियों से पाबंदी हटाने से संबंधित मुद्दों पर मतभेदों को दूर करने में विफल रहने के बाद वार्ता नाकाम हो गई।

‘एक्स’ पर एक पोस्ट में गालिबफ ने कहा कि ईरानी पक्ष ने ‘भविष्योन्मुखी पहल’ की, लेकिन विपक्षी पक्ष ‘इस दौर की वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास हासिल करने में विफल रहा।’

गालिबफ ने कहा, ‘‘वार्ता से पहले, मैंने इस बात पर जोर दिया था कि हमारे पास आवश्यक सद्भावना और संकल्प है, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण, हमें दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझ लिया है, और अब उसके पास यह तय करने का समय है कि वह हमारा विश्वास जीत सकता है या नहीं?’’

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान, ईरानी जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सैन्य बल के साथ-साथ सशक्त कूटनीति का भी अनुसरण करता है।

गालिबफ ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि ‘पावर’ की कूटनीति, ईरानी जनता के अधिकारों की प्राप्ति के लिए सैन्य संघर्ष के साथ-साथ एक और दृष्टिकोण है, और हम ईरानियों द्वारा 40 दिनों के राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों से जुड़ी उपलब्धियों को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।’’

उन्होंने शांति वार्ता को सुगम बनाने के लिए पाकिस्तान का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने वार्ताकारों का समर्थन करने के लिए ‘ईरान की वीर जनता’ की प्रशंसा की और पाकिस्तान में लंबी वार्ता के दौरान अथक प्रयास के लिए अपनी टीम की सराहना की।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘राजनयिक प्रक्रिया की सफलता दूसरे पक्ष की गंभीरता और सद्भावना पर निर्भर करती है, और यह अत्यधिक तथा अवैध मांगों से दूर रही है।’’

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन जैसे मुद्दों ने वार्ता में कुछ बाधाएं उत्पन्न कीं।

इस बीच, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक डार ने कहा कि इस्लामाबाद ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद और बातचीत को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाता रहा है और आने वाले दिनों में भी ऐसा करना जारी रखेगा।

डार ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार करने और पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को मान्यता देने के लिए दोनों पक्षों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

पश्चिम एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद और व्हाइट हाउस के सलाहकार जेरेड कुशनर भी अमेरिकी दल का हिस्सा थे।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में वार्ता शनिवार को दोनों पक्षों द्वारा छह दिवसीय युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद शुरू हुई।

वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के बीच यह पहली सीधी और उच्च स्तरीय बातचीत थी।

वेंस ने कहा कि वार्ताकार दल राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में था।

ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना रखी थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांगें शामिल थीं।

पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास का नेतृत्व किया, जो इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री शरीफ की अपील के बाद संभव हो पाया। इससे लड़ाई पर विराम लगा।

यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार ठप हो गया और व्यापार बाधित हुआ।

पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके संभावित दूरगामी प्रभावों के कारण इस वार्ता पर विश्वभर की नजरें टिकी थीं।

भाषा संतोष नरेश

नरेश