विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए संवाद की अपील की

विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए संवाद की अपील की

विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए संवाद की अपील की
Modified Date: July 23, 2026 / 08:45 pm IST
Published Date: July 23, 2026 8:45 pm IST

मनीला, 23 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित और निर्बाध रूप से खुले रहने चाहिए तथा नाविकों पर होने वाले हमलों को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने ये बातें फिलीपीन की राजधानी मनीला में आयोजित 21वें पूर्वी एशिया सम्मेलन (ईएएस) में कहीं।

जयशंकर ने कहा, “भारत इस बात पर जोर देता है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सुरक्षित और निर्बाध रूप से खुले रहने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “किसी भी परिस्थिति में नाविकों, असैन्य जहाजों या बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कई व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद यह टिप्पणी की है। इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत हुई है और कई अन्य को बचाया गया है।

ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

जयशंकर ने कहा, “आज दुनिया की अर्थव्यवस्था कई संघर्षों के असर से जूझ रही है। ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को अब सामान्य बात नहीं माना जा सकता, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए।’

उन्होंने कहा, “वैश्विक व्यवस्था इस समय अनिश्चित और अस्थिर है, जहां एक तरफ आपसी निर्भरता और साझा हित हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रतिस्पर्धा और टकराव भी मौजूद हैं।”

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप एक ‘ठोस, प्रभावी व कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता’ बनाए जाने का समर्थन करता है, जिससे सभी उपयोगकर्ताओं के वैध अधिकार प्रभावित न हों।

उन्होंने ‘राजनीतिक समाधान’ के जरिये म्यांमा के मुद्दे को हल करने की बात कही और कहा कि भारत इस मामले में आसियान के प्रयासों का लगातार समर्थन करता है।

उन्होंने साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन गिरोहों ने बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बनाया है।

इजराइल और फलस्तीन के बीच स्थायी शांति के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘भारत ने राहत और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को सहायता देने वाले प्रमुख उभरते देशों में शामिल है।’

उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका, क्षेत्रीय स्थिरता और स्वतंत्र, मुक्त एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

ईएएस पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और ओशिनिया क्षेत्र के नेताओं का एक वार्षिक सम्मेलन है।

ईएएस की स्थापना के बाद से इसकी बैठकें हर साल आसियान नेताओं के वार्षिक सम्मेलन के बाद आयोजित की जाती हैं। आसियान को इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में माना जाता है। भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश इसके संवाद साझेदार हैं।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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