नेपाल में बाढ़: रसुवा से निचले जिलों तक तबाही का मंजर

नेपाल में बाढ़: रसुवा से निचले जिलों तक तबाही का मंजर

नेपाल में बाढ़: रसुवा से निचले जिलों तक तबाही का मंजर
Modified Date: August 27, 2026 / 08:48 pm IST
Published Date: August 27, 2026 8:48 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

काठमांडू, 27 अगस्त (भाषा) नेपाल से आ रही तस्वीरें भोटे कोशी और त्रिशूली नदी गलियारों में आई भीषण अचानक बाढ़ से हुई तबाही के खौफनाक मंजर को बयां कर रही हैं। बाढ़ में मकान, सड़कें और पुल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं तथा विशाल इलाका कीचड़, पत्थरों और मलबे से पट गया है।

सबसे भीषण तबाही रसुवा और नुवाकोट से सामने आई है। वहां के प्रभावित इलाकों से आए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि इमारतें ढह गई हैं या बह गई हैं, सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं और नदी किनारे बसी बस्तियां मलबे के ढेर में बदल गई हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा के तिमुरे और रसुवागढ़ी में भोटे कोशी नदी के किनारे बसी बस्तियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

सीमा पार करने वाला रसुवागढ़ी नाका सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक रहा, जहां कई इमारतें और अन्य ढांचे या तो क्षतिग्रस्त हो गए या पानी में बह गए।

सड़क विभाग ने बताया कि नुवाकोट के बेटरावती से रसुवागढ़ी के बीच की पूरी 42 किलोमीटर लंबी सड़क कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि कई कंक्रीट के पुल बह गए हैं।

नदी के निचले बहाव वाले हिस्से में स्थित नुवाकोट के त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाकों में तबाही बेहद विकराल थी।

खबरों के मुताबिक त्रिशूली बाजार और उसके आसपास के करीब 60 मकान बह गए, जबकि त्रिशूली नदी पर बने दो पक्के वाहन पुल भी पानी के तेज बहाव में बह गए। पास का देवीघाट इलाका भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

त्रिशूली बाजार की तस्वीरों में इमारतें कीचड़ और मलबे के भारी जमाव के बीच खड़ी दिख रही हैं, जबकि नदी किनारे और उससे सटी सड़कों के बड़े हिस्से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।

बाढ़ से त्रिशूली और देवीघाट जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र के अन्य बिजली ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है।

यातायात बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ के कारण 35 पक्के पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

कई प्रभावित इलाकों में गाड़ियां भी बह गईं या कीचड़ और मलबे के नीचे दब गईं।

सड़कों और पुलों के टूट जाने से रसुवा में राहत एवं बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया है, क्योंकि कई आबादी वाले इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर फंसे हुए लोगों तक पहुंचने और तलाश अभियान चलाने का काम लगातार जारी है।

निचले इलाकों में बचाव दल भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में बहकर आए शवों को निकालने और तलाश अभियानों में जुटे हुए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुं, चितवन और नवलपरासी जिलों से शव बरामद किए गए हैं।

चितवन में बाढ़ का असर दर्दनाक दृश्यों और शवों की पहचान के रूप में सामने आ रहा है। गायब परिजनों की तस्वीरें हाथों में लिए परिवार भरतपुर अस्पताल के बाहर जमा हैं, इस उम्मीद में कि वे नदियों से निकाले गए शवों में अपने अपनों की पहचान कर सकें।

अस्पताल में बरामद शवों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि शवगृह में जगह कम पड़ गई है, जिसके चलते अधिकारी अतिरिक्त शवों को रखने के लिए अन्य व्यवस्थाएं कर रहे हैं।

बाढ़ का प्रभाव केवल घरों और सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि स्कूलों और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर भी पड़ा है।

‘नेपाल न्यूज’ ऑनलाइन पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक विदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जबकि प्रभावित जिलों में विद्युत आपूर्ति ढांचा भी ठप हो गया है।

यह बाढ़ अपने पीछे विनाश का ऐसा भयावह मंज़र छोड़ गई है, जिसका रूप निचले इलाकों में बदलता दिखता है – रसुवा और नुवाकोट में तबाह हुई बस्तियों और ढांचों से लेकर दक्षिण के इलाकों में बड़े पैमाने पर जारी खोज, बचाव और शव बरामदगी अभियान तक।

जैसे-जैसे बचाव दल कटे हुए इलाकों तक पहुंच रहे हैं और परिवार अपने लापता लोगों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, अधिकारी तबाही के कुल आकलन में जुटे हुए हैं।

भाषा सुमित माधव

माधव


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