‘ग्लोबल साउथ’ पर वैश्विक संकटों का सबसे अधिक असर लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पीछे: जयशंकर
‘ग्लोबल साउथ’ पर वैश्विक संकटों का सबसे अधिक असर लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पीछे: जयशंकर
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ पर भले ही वैश्विक संकटों का सबसे अधिक असर पड़ता है, लेकिन इन संकटों से जुड़े निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह ‘पीछे’ है।
उन्होंने इस क्षेत्र के विकासशील देशों के बीच ज्यादा एकजुटता की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर मंगलवार को ‘ग्लोबल साउथ’ के समान विचारधारा वाले देशों और सहयोगियों की उच्च-स्तरीय बैठक में जयशंकर ने कहा कि यह बैठक ‘‘काफी वैश्विक अनिश्चितता’’ के दौर में हो रही है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम इसे संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों, आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान, बढ़ती व्यापार बाधाओं, निवेश प्रवाह के विखंडन, जलवायु संबंधी झटकों और इस तथ्य में देख सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों पर भारी दबाव है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज ग्लोबल साउथ पर भले ही वैश्विक संकटों का सबसे अधिक असर पड़ता है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह पीछे की पंक्ति में है।’’
उन्होंने कहा कि अलग दौर में बनाई गई संस्थाएं आज भी उसी दौर के सत्ता-संरचना को दर्शाती हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ को निर्णय लेने वाले उन ढांचों का हिस्सा बनने की जरूरत है जो हमारे भविष्य से सीधे जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं संयुक्त राष्ट्र और कुल मिलाकर बहुपक्षवाद में सुधार करना है।’’
जयशंकर ने कहा कि पिछले साल दुनिया में संघर्षों की संख्या बढ़ी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब हमें बहुपक्षवाद की ओर रुख करने की जरूरत थी, हमने वास्तव में इसके विघटन को देखा। जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हम समाधान देने की उम्मीद करते हैं, वे इसके बजाय हमारे लिए हल करने लायक समस्या बन गए हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच एकजुटता के लिए आज से अधिक महत्वपूर्ण समय कभी नहीं रहा है।
जयशंकर ने उन प्राथमिकताओं की एक सूची भी पेश की, जिन पर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को आपूर्ति श्रृंखला, वित्त या कनेक्टिविटी, किसी भी मामले में रुकावटों को ‘स्वीकार या जायज नहीं ठहराना’ चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा सुरक्षा विकास के केंद्र में है। राजनीतिक मकसद के लिए इसकी उपलब्धता और कीमतों में हेर-फेर नहीं होनी चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य सुरक्षा एक साझा लक्ष्य है और ‘‘हमें इस दिशा में चुनौतियों, खासकर अनाज और उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का तेजी से समाधान करना चाहिए।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘ऐसी निष्पक्ष आर्थिक और व्यापारिक प्रक्रियाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए जो हमारी उत्पादन क्षमताएं बढ़ाए और हमें केवल उपभोक्ता बनाकर न छोड़ दें। औद्योगीकरण के हमारे अधिकार से हमें वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच उन्होंने कहा कि समुद्री साझा क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन किया जाना चाहिए और समुद्री यात्रियों तथा वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।
भाषा राजकुमार गोला
गोला

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