ग्रीक फायर: पूर्वी रोमन साम्राज्य का सबसे विनाशकारी हथियार, लेकिन आखिर यह था क्या?

ग्रीक फायर: पूर्वी रोमन साम्राज्य का सबसे विनाशकारी हथियार, लेकिन आखिर यह था क्या?

ग्रीक फायर: पूर्वी रोमन साम्राज्य का सबसे विनाशकारी हथियार, लेकिन आखिर यह था क्या?
Modified Date: July 20, 2026 / 04:12 pm IST
Published Date: July 20, 2026 4:12 pm IST

माइकल बी. चार्ल्स (सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी) और ईवा अनाग्नोस्तू-लाओटिडीज़ (मैक्वेरी यूनिवर्सिटी)

सिडनी, 20 जुलाई (द कन्वरसेशन) आधुनिक काल के सामूहिक विनाश के हथियारों से बहुत पहले एक ऐसा हथियार था, जिसे ‘ग्रीक फायर’ (इग्निस ग्रेकस) के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन धर्मयुद्ध के दौरान यूरोपीय योद्धाओं ने यह नाम बीजान्टिन (पूर्वी रोमन) साम्राज्य के उन अग्नि-अस्त्रों को दिया था जिनका इस्तेमाल लगभग 673 ईस्वी से लेकर कम-से-कम 1180 के दशक तक पूर्वी भूमध्यसागर में नौसैनिक युद्धों में किया गया।

ग्रीक फायर का सूत्र इतना गोपनीय रखा गया था कि 1453 में बीजान्टिन साम्राज्य के ओटोमन साम्राज्य के हाथों पतन के साथ ही इसका रहस्य भी हमेशा के लिए खो गया।

तब से लेकर आज तक अनेक रसायनविद, इतिहासकार, वैज्ञानिक और प्रायोगिक पुरातत्वविद इस रहस्यमयी हथियार का वास्तविक सूत्र जानने की कोशिश करते रहे हैं।

तो आखिर इस गुप्त ‘महाअस्त्र’ के बारे में हम वास्तव में क्या जानते हैं?

गुप्त हथियार का इस्तेमाल कैसे होता था?

ग्रीक फायर एक ज्वलनशील तरल पदार्थ था, जिसे बीजान्टिन युद्धपोतों के अगले हिस्से पर लगी पीतल या कांसे की नली (साइफन) के माध्यम से दुश्मन के जहाजों पर फेंका जाता था।

यह तरल जिस सतह पर गिरता, उससे चिपक जाता था। यहां तक कि पानी पर भी यह जलता रहता था और उसे बुझाना लगभग असंभव था। नेपाम (नैप्थालीन और नारियल के तेल से बना पदार्थ) की तरह काम करने वाला यह हथियार बीजान्टिन नौसेना को अपने दुश्मनों पर बड़ा सामरिक लाभ देता था।

सातवीं शताब्दी में उभरती हुई अरब शक्ति की समुद्री ताकत ने बीजान्टिन साम्राज्य के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी थीं।

अरबों की नौसैनिक तकनीक, विशेषकर त्रिकोणीय पाल ‘लेटीन सेल’, जहाजों को हवा की दिशा के अनुरूप आगे बढ़ने और अधिक फुर्ती से संचालन करने में सक्षम बनाती थी। ऐसे समय में ग्रीक फायर बीजान्टिन साम्राज्य के लिए निर्णायक हथियार बनकर उभरा।

बीजान्टिन सम्राट हमेशा से ही स्वयं को ईश्वरीय प्रेरणा से प्राप्त तकनीकों का संरक्षक बताकर अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता स्थापित करना चाहते थे।

इस हथियार का उल्लेख नौवीं शताब्दी के इतिहासकार और भिक्षु थियोफेन्स द कन्फेसर ने किया है। उनके अनुसार, इसका आविष्कार सीरिया के हेलियोपोलिस के यहूदी वास्तुकार कैलीनिकोस ने किया था, जिसे मुस्लिम सेनाओं के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा था।

थियोफेन्स के अनुसार, इस हथियार, जिसे उन्होंने ‘सी फायर’ (समुद्री अग्नि) कहा, का सफल इस्तेमाल लगभग 673 ईस्वी में सिजिकस के युद्ध के दौरान, बीजान्टिन साम्राज्य की राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल की नाकाबंदी कर रहे अरब बेड़े को नष्ट करने में किया गया था।

इस अग्नि ने अरब जहाजों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया और उनके सभी नाविक मारे गए।

हालांकि, थियोफेन्स यह भी लिखते हैं कि 671-672 ईस्वी में ही बीजान्टिन नौसेना के पास साइफन से लैस युद्धपोत मौजूद थे। इससे संकेत मिलता है कि कैलीनिकोस ने संभवतः इस हथियार का आविष्कार नहीं, बल्कि उसमें महत्वपूर्ण सुधार किया था।

ग्रीक फायर का इस्तेमाल बीजान्टिन सिंहासन पर कब्जा करने की कोशिश करने वाले विद्रोहियों के खिलाफ भी किया गया।

821 ईस्वी में स्लाव मूल के सैन्य अधिकारी थॉमस द स्लाव, जिसने सम्राट के खिलाफ विद्रोह किया था, उसकी नौसेना को सम्राट माइकल द्वितीय ने ग्रीक फायर की मदद से पराजित कर दिया।

913 से 959 ईस्वी तक शासन करने वाले सम्राट कॉन्स्टेंटाइन सप्तम पोर्फाइरोजेनिटस ने अपने प्रशासनिक ग्रंथ में विदेशियों को इस हथियार का रहस्य जानने की कोशिश करने से सावधान किया है।

उन्होंने लिखा:

‘‘यह रहस्य स्वयं ईश्वर ने एक देवदूत के माध्यम से महान और पवित्र सम्राट कॉन्स्टेंटाइन, पहले ईसाई सम्राट, को बताया था… इसलिए इसका निर्माण केवल ईसाइयों द्वारा और केवल उनके शासन वाले नगर में ही होना चाहिए। इसे किसी अन्य राष्ट्र को न सिखाया जाए और न ही भेजा जाए।’’

सम्राट ने यह भी दावा किया कि जब एक सैन्य अधिकारी ने इस रहस्य के साथ विश्वासघात किया, तो उसे ईश्वर ने दंड दिया।

उनके शब्दों में,

‘‘जब वह ईश्वर के पवित्र चर्च में प्रवेश करने ही वाला था, तभी स्वर्ग से अग्नि उतरी और उसे पूरी तरह भस्म कर दिया।’’

वाइकिंग और नॉर्मन सेनाओं के खिलाफ भी हुआ इस्तेमाल

11वीं शताब्दी में वाइकिंग नेता इंगवार का सामना ग्रीक फायर से लैस बीजान्टिन जहाजों से हुआ।

इस घटना का वर्णन करने वाली वाइकिंग गाथा के अनुसार, इस ज्वलनशील पदार्थ को पहले भट्ठी पर गर्म किया जाता था और फिर पीतल की नली से भयंकर गर्जना के साथ आग की लपटें निकलती थीं।

हालांकि, इस विवरण में यह नहीं बताया गया कि तरल पदार्थ को दबाव देकर बाहर निकालने के लिए एक पंप का भी इस्तेमाल किया जाता था। आधुनिक इतिहासकारों का मानना है कि नली के मुंह पर पहले से जलती हुई लौ रखी जाती थी, जिससे वाल्व खुलते ही बाहर निकलने वाला तरल तुरंत प्रज्वलित हो जाता था।

ग्रीक फायर के नौसैनिक इस्तेमाल का अंतिम उल्लेखनीय विवरण बीजान्टिन राजकुमारी एना कोम्नीना ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘एलेक्सियाड’ में दर्ज किया है।

उन्होंने लिखा है कि 1099 ईस्वी में रोड्स द्वीप के निकट पीसा गणराज्य के जहाजों के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया गया था। प्रत्येक जहाज के साइफन के मुंह पर शेर जैसे जंगली जानवर का सुनहरा सिर बना होता था, जिसके मुंह से आग निकलती थी। इससे दुश्मनों में भय और भी बढ़ जाता था।

एना कोम्नीना ने 1108 ईस्वी में नॉर्मनों के खिलाफ थल युद्ध में भी ग्रीक फायर के इस्तेमाल का उल्लेख किया है।

खो चुका है इसका असली सूत्र

आज तक यह निश्चित रूप से पता नहीं चल पाया है कि ग्रीक फायर किन पदार्थों से बनाया जाता था।

2002 में बीजान्टिन इतिहासकार जॉन हैल्डन के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि इसका मुख्य घटक एक विशेष प्रकार का कच्चा तेल था, जो केवल काला सागर और कैस्पियन सागर के बीच के क्षेत्र में मिलता था। उस समय यह इलाका बीजान्टिन साम्राज्य के नियंत्रण में था।

यह तेल हल्का और कम गाढ़ा था, लेकिन अत्यधिक ज्वलनशील था, जिससे यह आग उगलने वाले हथियार के लिए उपयुक्त माना जाता था।

संभव है कि इसमें चीड़ (पाइन) की राल या उसका तेल भी मिलाया जाता रहा हो, जो चिपचिपा होने के साथ-साथ अत्यधिक ज्वलनशील भी होता है।

ग्रीक फायर की विरासत

यद्यपि ग्रीक फायर अपने समय का अत्यंत प्रभावी हथियार था, लेकिन समय के साथ इसका इस्तेमाल कम होता गया।

संभव है कि आग को दूर तक फेंकने वाली तकनीक का रहस्य खो गया हो या फिर जिस विशेष कच्चे तेल की आवश्यकता होती थी, वह क्षेत्र बीजान्टिन साम्राज्य के नियंत्रण से बाहर चला गया हो।

इसके बावजूद ग्रीक फायर ने इतिहास और लोकप्रिय संस्कृति पर गहरी छाप छोड़ी।

अमेरिकी लेखक जॉर्ज आर.आर. मार्टिन के लोकप्रिय फंतासी उपन्यासों और उन पर आधारित टीवी श्रृंखला ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ में दिखाई देने वाला ‘वाइल्डफायर’ को काफी हद तक ग्रीक फायर से प्रेरित माना जाता है। वहां भी यह एक अत्यंत गोपनीय राजकीय हथियार है, जो पानी पर भी धधक सकता है।

इस तरह ग्रीक फायर की भयावह और पौराणिक शक्ति से नयी पीढ़ी भी अवगत हुई।

द कन्वरसेशन नरेश सुभाष

सुभाष


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