ब्रिटेन : प्रधानमंत्री बर्नहम ने तीसरी कोशिश में हासिल किया मुकाम
ब्रिटेन : प्रधानमंत्री बर्नहम ने तीसरी कोशिश में हासिल किया मुकाम
(अदिति खन्ना)
लंदन, 20 जुलाई (भाषा) एंडी बर्नहम ने सोमवार को ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला। उन्होंने यह सफलता अपनी तीसरी कोशिश में हासिल की है।
महाराजा चार्ल्स तृतीय के साथ पारंपरिक बैठक के तुरंत बाद प्रधानमंत्री के तौर पर देश के नाम अपने पहले संबोधन में बर्नहम ने कहा, ‘‘मुझे भली भांति एहसास है कि पिछले 10 वर्षों में इस डाउनिंग स्ट्रीट की प्रतिष्ठित इमारत में निवास करने आने वाला मैं छठा व्यक्ति हूं और 2016 के बाद से सातवां प्रधानमंत्री हूं। यह पल चिंतन और नए संकल्प का है।’’
ग्रेटर मैनचेस्टर के 56-वर्षीय पूर्व महापौर बर्नहम अपनी तीसरी कोशिश में देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने वर्ष 2010 और 2015 में भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन असफल रहे।
बर्नहम ने 2019 में भारत आए एक बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। भारत के साथ उन्होंने संबंध बढ़ाने का संकल्प लिया है और उम्मीद की जा रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
उन्होंने उस समय कहा था, ‘‘ग्रेटर मैनचेस्टर के अंतरराष्ट्रीयकरण की रणनीति में भारत एक अहम बाज़ार है, क्योंकि यह (भारत) इस शहर-क्षेत्र के लिए बड़े अवसर पेश करता है, लेकिन ये अवसर आपसी हैं और ग्रेटर मैनचेस्टर भी भारत की आर्थिक विकास योजनाओं में उसकी मदद कर रहा है।’’
पूर्व महापौर ने पिछले महीने उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफ़ील्ड में उपचुनाव जीतकर वेस्टमिंस्टर की राजनीति में वापसी की। इस जीत को ‘रिफ़ॉर्म यूके’ (एक दक्षिणपंथी पार्टी) से बढ़ते ख़तरे का मुकाबला करने की उनके नेतृत्व क्षमता के सबूत के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद दिये अपने पहले भाषण में बर्नहम ने एक नयी ‘10-वर्षीय’ योजना का वादा किया है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि 2029 में होने वाले अगले आम चुनाव तक इस नई ज़िम्मेदारी में अपना सब कुछ झोंककर वह कई कार्यकाल तक पद पर बने रहेंगे।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्तानक बर्नहम का जन्म उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड के मर्सीसाइड में हुआ था। उनके पिता टेलीफ़ोन इंजीनियर थे और मां एक जीपी क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। वह वेल्स की सीमा से सटे चेशायर में पले-बढ़े।
बर्नहम ने लेबर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के लिए अनुसंधानकर्ता और विशेष सलाहकार के तौर पर राजनीतिक पारी की शुरुआत की तथा 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के ली से सांसद के तौर पर अपना पहला आम चुनाव जीता।
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के कार्यकाल में एक होनहार युवा सांसद के तौर पर उभरने के बाद, उनके उत्तराधिकारी गॉर्डन ब्राउन की मंत्रिमंडल में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। ब्राउन सरकार में उन्हें राजकोष मामलों के प्रमुख से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक कई अहम जिम्मेदारी दी गई।
उन्होंने 2010 में प्रधानमंत्री पद के लिए पहली बार नाकाम दावेदारी पेश की और उसी साल आम चुनाव में लेबर पार्टी की हार के समय वह मिलिबैंड के छद्म मंत्रिमंडल में काम किया। इसके बाद, 2015 में नेतृत्व की दौड़ में वह जेरेमी कॉर्बिन से हार गए और फिर महापौर बनने की कोशिश की वजह से 2017 में उन्हें सांसद पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा।
बर्नहम के मैनचेस्टर का महापौर चुने जाने के बाद, उन्हें ‘‘किंग ऑफ़ द नॉर्थ’’ कहा जाने लगा। यह नाम अमेरिकी नाटक ‘गेम ऑफ़ थ्रोन्स’ से लिया गया था। वह लेबर पार्टी के नेतृत्व के लिए तीसरी बार कोशिश करने का सही मौका तलाश रहे थे जो पिछले सप्ताह मिला और वह सफल रहे।
उनकी नीदरलैंड मूल की पत्नी मैरी-फ्रांस वैन हील और 20 की उम्र वाले उनके तीन बच्चे – जिमी, रोज़ी और ऐनी-मैरी – लंदन और उत्तरी इंग्लैंड के बीच अपना समय बिताएंगे। यह कयास बर्नहम द्वारा ‘‘नंबर 10 नॉर्थ’’ के दिये गए प्रस्ताव मद्देनजर लगाया जा रहा है।
बर्नहम का कहना है कि सत्ता केवल ‘10 डाउनिंग स्ट्रीट’ तक ही सीमित न रहे।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश

Facebook


