बेरूत, चार जून (एपी) ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने बृहस्पतिवार को इजराइल और लेबनान सरकार के बीच हुए नवीनतम युद्धविराम समझौते को खारिज करते हुए इजराइली सेना की पूर्ण वापसी की मांग की।
इस बीच, इजराइली हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि गोलीबारी के दौरान संयुक्त राष्ट्र का एक शांति सैनिक भी मारा गया।
हिजबुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने टेलीविजन पर प्रसारित एक लिखित बयान में कहा कि समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्ला के लड़ाकों को हटाने की मांग का अर्थ ‘‘आत्मसमर्पण, पराजय और दुश्मन के उद्देश्यों की पूर्ति’’ होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चिंता आक्रामकता की समाप्ति, युद्धविराम और इजराइल की वापसी को लेकर है।’’
कासिम ने यह भी कहा कि ‘‘जब तक कब्जा जारी रहेगा, तब तक प्रतिरोध समाप्त करने की हमने किसी भी पक्ष से कोई प्रतिबद्धता नहीं की है।’’
दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर इजराइली सेना के कब्जे के बीच जारी संघर्ष ने क्षेत्र में शांति प्रयासों को जटिल बना दिया है। ईरान ने मांग की है कि किसी भी स्थायी युद्धविराम में लेबनान को भी शामिल किया जाए। वहीं, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हिजबुल्ला से खतरा समाप्त नहीं हो जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) और सर्बिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के मरजायून क्षेत्र में एक मोर्टार गोला गिरने से सर्बिया का एक शांति सैनिक मारा गया और दो अन्य घायल हो गए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गोला इजराइल की ओर से दागा गया था या हिजबुल्ला की ओर से।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि मारूब गांव में ड्रोन हमले में एक मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई जबकि चार लोग घायल हुए। पूर्वी लेबनान की बेका घाटी स्थित सोहमोर गांव पर हुए हवाई हमलों में तीन अन्य लोगों की भी मौत हुई।
इजराइली सेना ने इन घटनाओं पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की, हालांकि उसने दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में लोगों को न जाने की चेतावनी दी है।
दक्षिणी शहर सैदा (सिडोन) में कई स्थानीय निवासियों ने युद्धविराम घोषणा पर संदेह जताया। एक निवासी मयादा हिजाजी ने कहा, ‘‘हर कुछ दिनों में युद्धविराम की घोषणा होती है, लेकिन लोग मरते रहते हैं।’’
स्थानीय निवासी सलाह नस्साब ने कहा, ‘‘यह केवल बातें हैं, कोई ठोस कार्रवाई नहीं। हम घर लौटते हैं और फिर विस्थापित हो जाते हैं। हम बहुत थक चुके हैं।’’
इस संघर्ष के दौरान इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में वर्ष 1982-2000 के कब्जे के बाद सबसे अधिक अंदर तक पहुंच गई है और वर्तमान में देश के लगभग पांचवें हिस्से पर उसका नियंत्रण है।
लेबनान में अब तक 3,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। वहीं, इस संघर्ष में 27 इजराइली सैनिक और तीन नागरिक भी मारे गए हैं।
नवीनतम युद्धविराम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान सरकार के बीच हुई वार्ता के बाद सामने आया। लेबनान सरकार ने पहले भी हिजबुल्ला को निरस्त्र करने के प्रयास किए हैं और उस पर देश को युद्ध में धकेलने का आरोप लगाया है।
हालांकि, समझौते में हिजबुल्ला औपचारिक रूप से शामिल नहीं है। इसमें लेबनान की सेना को उन सुरक्षा क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपने की बात कही गई है, जहां हिजबुल्ला की मौजूदगी पर रोक होगी।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने बृहस्पतिवार को इस समझौते को ‘‘अंतिम और व्यापक युद्धविराम की दिशा में आखिरी अवसर’’ बताया। उन्होंने कहा कि हिजबुल्ला सहित संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद लेबनान सरकार इस समझौते को लागू करने के लिए तैयार है।
इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी ने लेबनान में पूर्ण युद्धविराम और इजराइली सेना की वापसी की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि लेबनान में ‘‘प्रतिरोध’’ का समर्थन करना सभी का दायित्व है।
क्षेत्रीय तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप तथा सैन्य गतिविधियों के चलते यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ा है।
बुधवार को कुवैत के एक वाणिज्यिक हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए। ईरान ने इस हमले में किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
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