( मैक्साइम ऑबर्ट, ऐडम ब्रुम – ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी एवं रेनॉड जोआनेस – सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 22 जनवरी (द कन्वरसेशन) एक नए शोध में पता चला है कि इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर पाए गए गुफा चित्र मानवता की अब तक की सबसे पुरानी ज्ञात गुफा कला हैं।
यह खोज यूरोप में पाए जाने वाले फ्रांस और स्पेन के प्रसिद्ध गुफा चित्रों से हजारों साल पहले की कला का सबूत देती है।
‘नेचर’ जर्नल में आज प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि पूर्वी इंडोनेशिया में रहने वाले लोग अब तक सोचे गए समय से कहीं पहले पत्थर पर चित्र बना रहे थे। ये कलाकार न केवल विश्व के शुरुआती चित्रकारों में शामिल थे, बल्कि संभवतः उन आबादियों का हिस्सा थे जो बाद में ऑस्ट्रेलिया और पापुआ के आदिवासी पूर्वजों के तौर पर विकसित हुईं।
सुलावेसी की चूना-पत्थर की गुफाओं में लाल रंग के हाथ से बनाए गए स्टेंसिल पाए गए हैं, जो पत्थर पर दबा कर रखे गए हाथ पर रंग को फूंककर डालते हुए बनाये गये थे।
यूरेनियम के सूक्ष्म विश्लेषण से चित्रों के बनने का समय कम से कम 67,800 वर्ष पुराना पाया गया, जिससे यह पूरी दुनिया की अब तक की सबसे पुरानी, सुरक्षित रूप से जांची गयी गुफा कला बन गयी। यह क्षेत्रीय चित्रों से 15,000 वर्ष और फ्रांस के सबसे पुराने गुफा चित्रों से 30,000 वर्ष पुराना है।
एक हाथ का स्टेंसिल विशेष है क्योंकि यह शैली केवल सुलावेसी में ही देखने को मिली और पाई गई। इसकी उंगलियों के छोरों को जानवरों के पंजे जैसी आकृति दी गई थी जिससे प्रतीत होता है कि इस कला का प्रतीकात्मक अर्थ संभवतः मानव और पशु संबंधों के बारे में प्राचीन समझ से जुड़ा था। इससे पहले सुलावेसी में पक्षी जैसे सिर वाले मानव चित्र और अन्य पशु-संरचना वाले चित्र भी पाए गए थे, जो कम से कम 48,000 वर्ष पुराने थे।
शोध से यह भी पता चलता है कि पत्थरों की इन गुफाओं में चित्रकला एक लंबी अवधि तक जारी रही, करीब 20,000 वर्ष पहले आखिरी हिम युग तक। बाद में लगभग 4,000 वर्ष पहले इंडोनेशिया के पहले किसान, ऑस्ट्रोनीशियन भाषी लोग इस इलाके में आए और पुराने चित्रों के ऊपर उन्होंने अपनी कल्पना को आकार दिया।
शोध से यह भी संकेत मिलता है कि इन चित्रों को बनाने वाले लोग संभवतः उन आबादी का हिस्सा थे, जिन्होंने समुद्र पार किया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी पहुंचे तथा बस गए। इन लोगों को आधुनिक आदिवासी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के पूर्वज के तौर पर जाना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज दिखाती है कि प्रारंभिक मानव की रचनात्मकता केवल यूरोप तक सीमित नहीं थी, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भी प्रतीकात्मक व्यवहार, कला और सामाजिक पहचान की जटिल समझ पहले से मौजूद थी।
यह खोज मानव संस्कृति की उत्पत्ति और प्रारंभिक रचनात्मकता के भूगोल को पुनर्विचार करने का संकेत देती है और बताती है कि इंडोनेशिया और आसपास के द्वीपों में और भी प्राचीन कला की खोज हो सकती है।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश
नरेश