CM Sai Letter to Mamata Banerjee: राष्ट्रपति के अपमान पर छलका CM साय का दर्द, इस मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, की ये अपील, जानिए क्या है पूरी घटना

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CM Sai Letter to Mamata Banerjee: राष्ट्रपति के अपमान पर छलका CM साय का दर्द, इस मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, की ये अपील, जानिए क्या है पूरी घटना

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 01:51 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 02:07 PM IST

CM Sai Letter to Mamata Banerjee | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पश्चिम बंगाल में प्रोटोकॉल के अनुसार रिसीव नहीं किया गया
  • छत्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय ने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई
  • कार्यक्रम स्थल छोटा होने से संथाल समुदाय के लोग शामिल नहीं हो पाए

रायपुर: CM Sai Letter to Mamata Banerjee छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पश्चिम बंगाल के सीएम ममता बनर्जी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई है। अपने पत्र में सीएम साय ने लिखा है कि ‘ममताजी, आशा है। आप सानंद होंगी। आपको दूसरी बार बड़े ही दुखी मन से यह पत्र लिख रहा हूं आशा है कि आप संज्ञान लेंगी। भारत की लोकतांत्रिक परम्पराएं और शिष्टाचार हमेशा से प्रशंसित रहे हैं। यहां मतभेद को कभी भी मनभेद नहीं बनाया गया। हमें इसे अक्षुण्ण रखना चाहिए। जनजाति समाज से आनेवाली भारत की महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूजी के साथ पिछले दिनों आपके द्वारा किया गया अपमान इन परंपराओं को तिलांजलि सा देता महसूस हुआ है। मुझे इसका दुःख है। ‘

CM Sai Letter to Mamata Banerjee सीएम साय ने आगे कहा कि ‘महिला दिवस से ठीक पहले आपके द्वारा किया गया यह व्यवहार अक्षम्य है। विशेषकर आप स्वयं महिला हैं और बावजूद इसके ऐसा किया जाना अत्यधिक पीड़ादायक है। हमें अब तक लगा था कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुई ऐसी दुखद घटना पर आप दुःख जताएंगी, पर उस घटना के बाद आपकी प्रतिक्रिया ने देश को और अधिक आहत किया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य शासन के विरुद्ध राष्ट्रपतिजी को अपनी व्यथा सार्वजनिक करनी पड़ी है, यह अत्यधिक कष्टकर है। पश्चिम बंगाल, जिसके भद्र लोक की विश्व भर में चर्चा है, यह उस राज्य की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचाने वाला है।’

सीएम साय ने कहा कि ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ऐन पहले एक जनजातीय समाज से आनेवाली महिला राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया जाना, जनजातीय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम का स्थान मनमाने ढंग से बदल देना, राष्ट्रपतिजी को मूलभूत सुविधाओं तक से वंचित रखकर आपने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का भी उल्लंघन किया है। यह अपमान वास्तव में निंदनीय है। यह विशेषकर देश भर के मेरे जैसे करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों का अपमान है। मातृशक्ति का भी आपने अपमान किया है।’

‘इससे पहले भी हमने संदेशखाली कांड पर आपका ध्यान आकृष्ट कराया था, वहां जनजातीय समाज की स्त्रियों के विरुद्ध भी आपकी पार्टी के नेताओं द्वारा अपराध की पराकाष्ठा पार कर दी गयी थी, तब भी आपने मुद्दे पर बात नहीं कर अपनी आदिवासी-वंचित विरोधी मानसिकता का परिचय दिया था। आखिर जनजातीय समाज ने आपका क्या बिगाड़ा है? पश्चिम बंगाल के संथाल समाज समेत सभी निवासियों की प्रदेश के विकास में भागीदारी रही है। आपके द्वारा पश्चिम बंगाल के वंचित समाज से लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है, यह सर्वथा अनुचित है। प्रदेश की जनता इसे कभी भी नहीं भूलेगी।’

‘आपसे आग्रह है कि कृपया सच्चे मन से देश समाज और राष्ट्रपतिजी से क्षमा मांग कर अपनी भूल स्वीकारें और आगे से हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अच्छा भाव रखने के प्रति देश को आश्वस्त करें। ऐसा किया जाना आपकी निजी छवि को ठीक करने की दृष्टि से भी उपयोगी रहेगा। आशा है. आप ध्यान देंगी। धन्यवाद।’

जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र पहुंची थीं। तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य का कोई मंत्री मौजूद नहीं था। जिसको लेकर खुद राष्ट्रपति ने इस बात पर नाराजगी जताई। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कॉन्फ्रेंस के लिए तय किए गए स्थान को लेकर नाराजगी जाहिर की। राष्ट्रपति ने कहा कि कार्यक्रम के लिए जो जगह तय की गई थी वह काफी छोटी थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि उस जगह पर पांच हजार लोगों के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।

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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पश्चिम बंगाल में प्रोटोकॉल के अनुसार रिसीव नहीं किया गया और कार्यक्रम स्थल छोटा होने से नाराज़गी जताई गई।

छत्तीसगढ़ सीएम ने क्या कहा?

विष्णुदेव साय ने पत्र लिखकर इसे आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान बताया और ममता बनर्जी से क्षमा मांगने की अपील की।

कार्यक्रम कौन सा था?

9वां अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस, जो सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित हुआ।