भारत और भूटान ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की

Ads

भारत और भूटान ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की

  •  
  • Publish Date - September 18, 2026 / 01:41 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 01:41 PM IST

थिंपू, 18 सितंबर (भाषा) भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और विकास सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की।

जयशंकर बुधवार को दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर भूटान पहुंचे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों और सहयोग को और मजबूत करना है।

भारतीय विदेश मंत्री ने भूटान यात्रा के दौरान यहां के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भेंट की और अपने भूटानी समकक्ष डी.एन. ढुंगेल के साथ बातचीत की।

जयशंकर ने बृहस्पतिवार को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज थिंपू में भूटान के राजा महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। भारत और भूटान के बीच अनोखी दोस्ती को और मजबूत करने के लिए उनके मार्गदर्शन को हम महत्व देते हैं।’’

शुक्रवार को जारी एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार,‘‘दोनों पक्षों ने आपसी महत्व के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की।’’

विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘भारत-भूटान की विशेष और कई तरह की साझेदारी’’ को दोनों पक्षों ने मजबूत करने की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की।

इसमें कहा गया, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय विकास सहयोग में हुई प्रगति की प्रशंसा की।’’

जयशंकर ने भूटान के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के लिए भारत के समर्थन को दोहराया, जबकि भूटान ने अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत कई तरह के कार्यक्रमों के लिए भारत के समर्थन की सराहना की।

विदेश मंत्री ने भूटान के अपने समकक्ष के साथ विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, संपर्क, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों में बहुआयामी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

उन्होंने अपनी भूटान यात्रा के दौरान कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें मोंगर में 65 बिस्तरों वाला ग्यालत्सुएन जेटसुन पेमा जच्चा बच्चा अस्पताल भी शामिल है।

विदेशमंत्री ने उत्तरी भूटान के गासा में 500 किलोवाट की लुनाना जलविद्युत परियोजना की आधारशिला भी रखी।

जयशंकर ने भारत की ओर से बुमथांग स्थित राष्ट्रीय मवेशी प्रजन्न केंद्र को 43 जर्सी गायें और भूटान की सरकार को 54 इलेक्ट्रिक वाहन सौंपे।

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)-आधारित सुविधा के शुरू होने का स्वागत किया, जिससे भूटान के नागरिक भूटान के मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके भारत में डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे।

दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में चल रहे सहयोग पर भी चर्चा की और ग्लेशियर, वन संसाधनों, बाढ़ और कृषि की निगरानी जैसे क्षेत्रों में उपग्रह आंकड़ों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।

जयशंकर ने ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ (जीएमसी) के लिए भूटान के राजा के दृष्टिकोण के प्रति भारत सरकार के समर्थन को फिर से दोहराया और दोनों पक्षों ने जीएमसी से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी रखने पर सहमति जताई।

दोनों मंत्रियों ने मार्च 2024 की ऊर्जा साझेदारी पर संयुक्त दृष्टिकोण के कार्यान्वयन पर भी संतोष व्यक्त किया।

उन्होंने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती कर्ज सुविधा के समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और देश की जलविद्युत परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इससे मौजूदा ऊर्जा सहयोग को नयी गति मिल रही है।

दोनों पक्षों ने असम के समरांग में नए लैंड कस्टम्स स्टेशन (भूमि पर स्थित वह सीमा चौकी जिसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए अधिसूचित किया जाता है) के हाल ही में शुरू होने का स्वागत किया और कहा कि यह सीमा-पार कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए की गई संयुक्त कोशिशों को दर्शाता है।

उन्होंने गेलेफू और कोकराझार तथा समत्से और बनरहाट के बीच सीमा-पार रेल लिंक स्थापित करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की।

जयशंकर ने ढुंगेल को अपनी सुविधानुसार यथाशीघ्र भारत आने का निमंत्रण दिया।

भाषा

धीरज मनीषा

मनीषा