आईएमईसी के लिए भारत ‘रणनीतिक कूटनीतिक प्रेरक’ है : कोलंबिया विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट

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आईएमईसी के लिए भारत ‘रणनीतिक कूटनीतिक प्रेरक’ है : कोलंबिया विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 03:20 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 03:20 PM IST

(योषिता सिंह)

न्यूयॉर्क, 25 जून (भाषा) भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए भारत एक रणनीतिक और कूटनीतिक प्रेरक के तौर पर अहम भूमिका निभाता है और यह गलियारा वैश्विक व्यापार के ढांचे को ‘कमजोर’ बिंदुओं से हटाकर ‘मजबूत रास्तों’ की ओर ले जाने का एक बेहतरीन मौका है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्रों के एक ‘कैपस्टोन प्रोजेक्ट’ में यह बात कही गई है।

‘भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा : रणनीति एवं परिचालन’ कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स’ (एसआईपीए) का एक ‘कैपस्टोन प्रोजेक्ट’ है, जिसे ‘विश्वामित्र रिसर्च फाउंडेशन’ (वीआरएफ) के सहयोग से किया जा रहा है।

कारली बेनब्रिज, सेनेका फोर्च, यिनी ली, सेलिया सादा, युकी (विकी) वांग और मार्क यामनित्स्की का यह प्रोजेक्ट आईएमईसी के लिए परिचालन और संस्थागत डिजाइन से जुड़ी सिफारिशें तैयार करता है। इसमें इस बात पर खास ध्यान दिया गया है कि गलियारे को कैसे असरदार, बेहतर तालमेल वाला और राजनीतिक रूप से टिकाऊ बनाया जाए।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘आगे की बात करें तो, आईएमईसी के लिए एक रणनीतिक और कूटनीतिक प्रेरक के तौर पर भारत की भूमिका बहुत अहम है। यह देश पश्चिम एशिया के टकरावों में किसी भी पक्ष के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ा है और उन चुनिंदा देशों में से एक है जो एक-दूसरे के विरोधी गुटों के साथ एक ही समय में बातचीत का रास्ता खुला रखने में सक्षम है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह, भारत के पास आईएमईसी के शुरुआती दौर में क्षेत्रीय मतभेदों के बीच तालमेल बिठाने के लिए कुछ हद तक कूटनीतिक लचीलापन है और भविष्य में वह इसके सचिवालय की मेजबानी भी कर सकता है।

भाषा शफीक रंजन

रंजन