(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, चार जून (भाषा) परमाणु ऊर्जा संस्थान (एनईआई) की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मारिया कोर्सनिक ने कहा कि भारत की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और इंजीनियरिंग प्रतिभा उसे तेजी से बढ़ रहे असैन्य परमाणु क्षेत्र में अमेरिका का आदर्श साझेदार बनाती है।
कोर्सनिक करीब 15 दिन पहले अमेरिकी परमाणु उद्योग के 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत गयी थीं। उनकी यात्रा ऐसे समय हुई, जब नयी दिल्ली ने जवाबदेही संबंधी कानून में ढील देकर लंबे समय से नियंत्रित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता खोलना शुरू किया है।
एनईआई कार्यालय में ‘पीटीआई-भाषा’ से विशेष बातचीत में कोर्सनिक ने कहा, ‘‘भारत की आपूर्ति श्रृंखला बहुत मजबूत है और इंजीनियरिंग प्रतिभा भी। आप परमाणु ऊर्जा के लिए नए नहीं हैं। आप इसे समझते हैं और एक स्थापित क्षेत्र के रूप में इसके साथ बहुत अच्छा काम किया है। यही बात इसे अमेरिकी नवाचार के साथ आगे बढ़ने के लिए आदर्श साझेदार बनाती है।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के जरिए वर्षों तक नवाचार को बढ़ावा दिया, जो अब बाजार में आ रहा है।
कोर्सनिक ने कहा, ‘‘यह बिल्कुल आदर्श साझेदारी जैसा लगता है। मुझे लगता है कि हम दोनों अपनी-अपनी मजबूत क्षमताओं के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यही इस विश्वास का आधार है।’’
कोर्सनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों ने परमाणु क्षेत्र के विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं, जो मिलकर काम करने का अवसर प्रदान करती हैं।
भारत की योजना 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.78 गीगावॉट से बढ़ाकर 100 गीगावॉट करने की है। इसी दौरान अमेरिका भी अपनी क्षमता 100 गीगावॉट से बढ़ाकर 400 गीगावॉट करना चाहता है।
कोर्सनिक ने कहा, ‘‘यही वजह है कि हम मिलकर काम कर रहे हैं, क्योंकि हम दोनों बहुत बड़े विस्तार के दौर से गुजर रहे हैं।’’
उन्होंने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) को भविष्य के विकास का अहम क्षेत्र बताया।
अमेरिका एसएमआर की तैनाती में तेजी लाने के लिए भारी निवेश कर रहा है। कम से कम तीन ऐसी प्रायोगिक परियोजनाएं चार जुलाई तक चालू होने की उम्मीद है।
कोर्सनिक ने कहा कि ‘शांति एक्ट’ (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु क्षेत्र में पिछले दो दशकों के दौरान जवाबदेही संबंधी अनसुलझे मुद्दों के कारण खोई हुई रफ्तार को वापस लाने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘20 साल पहले जब परमाणु समझौता हुआ था, तब हम एक व्यापार मिशन लेकर भारत गए थे। काफी उत्साह था। ऐसा लग रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है। और अब देखिए, 20 साल बीत गए।’’
भारत और अमेरिका ने जुलाई 2005 में असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अगले तीन वर्षों में अमेरिका ने अपने कानूनों में बदलाव किए, जिससे भारत परमाणु ईंधन और तकनीक, दोनों के क्षेत्र में वाशिंगटन के साथ व्यापार कर सका।
लेकिन 2010 में परमाणुवीय नुकसान के लिए सिविल दायित्व अधिनियम पारित हुआ, जिसमें परमाणु उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर सख्त जवाबदेही निर्धारित की गई। इसी वजह से दुनियाभर की निजी कंपनियां भारतीय बाजार से दूर रहीं।
कोर्सनिक ने कहा, ‘‘शांति एक्ट वास्तव में एक नयी नींव है, जो हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए नए दरवाजे खोलती है।’’
भाषा खारी गोला
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