Board of Peace Organization:
नई दिल्लीः Board of Peace Organization अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा के लिए गठित किए गए अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में शांति स्थापित करना, युद्ध से तबाह हुए ढांचे का पुनर्निर्माण करना और नई शासन व्यवस्था को आगे बढ़ाना है। यह पहल 15 जनवरी को ट्रंप की 20 बिंदुओं वाली शांति योजना के दूसरे चरण के तहत घोषित की गई थी।
Board of Peace Organization बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य कार्य गाजा को हथियारों से मुक्त करना, मानवीय सहायता सुनिश्चित करना, नष्ट हो चुके बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना और एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना करना है। इस प्रशासन की निगरानी नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) करेगी, जिसकी अगुआई पूर्व फिलिस्तीनी अधिकारी अली शाथ कर रहे हैं।
अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने 16 जनवरी को बताया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने NCAG के गठन की घोषणा कर दी है। साथ ही यह भी कहा गया कि आने वाले दिनों में एग्जीक्यूटिव बोर्ड और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के अन्य सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र के मिडिल ईस्ट के पूर्व दूत निकोलाय म्लादेनोव को गाजा के लिए हाई रिप्रेजेंटेटिव बनाया गया है। इसके अलावा एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का भी गठन किया गया है, जिसमें तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, संयुक्त अरब अमीरात की मंत्री रीम अल-हाशिमी, कतर के राजनयिक अली अल-थावादी सहित कई क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे इस पहल में अमेरिकी नेतृत्व के साथ अरब देशों की सक्रिय भागीदारी भी स्पष्ट होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ट्रंप ने दुनिया के कई प्रमुख नेताओं को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने इस न्योते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए इसे अपने देश के लिए सम्मान बताया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी को भी निमंत्रण भेजा गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिला है। वहीं, इस सप्ताह होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी गाजा के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजा संकट के समाधान के लिए इस पहल को एक बड़े कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भारत सहित कई प्रभावशाली देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है।