भारत ने नैम की बैठक में फलस्तीन के मुद्दे के द्विराष्ट्र समाधान के लिए समर्थन दोहराया

भारत ने नैम की बैठक में फलस्तीन के मुद्दे के द्विराष्ट्र समाधान के लिए समर्थन दोहराया

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  • Publish Date - October 16, 2025 / 05:16 PM IST,
    Updated On - October 16, 2025 / 05:16 PM IST

कंपाला (युगांडा), 16 अक्टूबर (भाषा) भारत ने फलस्तीन मुद्दे के लिए बातचीत के जरिए द्विराष्ट्र समाधान के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई है और इसे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और समृद्धि प्राप्त करने का ‘एकमात्र व्यवहार्य मार्ग’ बताया है।

बुधवार को युगांडा की राजधानी कंपाला में फलस्तीन पर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नैम) की मंत्रिस्तरीय समिति की बैठक में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता के अपरिहार्य अधिकारों के प्रति अपने समर्थन में दृढ़ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अंतिम उद्देश्य बातचीत के जरिए द्विराष्ट्र समाधान है, जो स्थायी शांति और समग्र समृद्धि प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति के मानदंड स्पष्ट हैं – एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राष्ट्र जो इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ, सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, कंधे से कंधा मिलाकर रहे।

विदेश राज्य मंत्री ने सात अक्टूबर, 2023 को गाजा में संघर्ष के बढ़ने के बाद से भारत की निरंतर स्थिति पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आतंकवाद की निंदा करते हैं और मानते हैं कि नागरिकों का विनाश, निराशा और पीड़ा समाप्त होनी चाहिए। गाजा में बिना किसी बाधा के भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचनी चाहिए; बंधकों को रिहा किया जाना चाहिए; और तुरंत युद्धविराम लागू होना चाहिए।’’

फलस्तीन के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए, सिंह ने कहा कि फलस्तीन पर गुटनिरपेक्ष आंदोलन मंत्रिस्तरीय समिति की स्थापना 1983 में नयी दिल्ली में गुटनिरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की अध्यक्षता में हुई थी।

उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली फलस्तीनी लोगों को विकास सहयोग और मानवीय सहायता प्रदान करना जारी रखे हुए है।

सिंह ने कहा, ‘‘केवल अक्टूबर 2023 से, भारत ने लगभग 135 मीट्रिक टन दवाओं और आपूर्ति की राहत सहायता प्रदान की है।’’

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के पहले चरण पर हाल ही में हुए समझौते का स्वागत किया और इसे क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक कदम बताया।

उन्होंने समझौते को सुगम बनाने में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दोनों सदस्यों, मिस्र और कतर की भूमिका की भी सराहना की।

सिंह ने कहा, ‘‘इस समय, शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। सभी को अपनी-अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए।’’

उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक शांतिपूर्ण और स्थिर पश्चिम एशिया के दृष्टिकोण में योगदान देने और उस दिशा में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के अपने सहयोगियों के साथ रचनात्मक रूप से काम करने के लिए तैयार है।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा