एआई क्षेत्र में भारत-अमेरिका साझेदारी से कई क्षेत्रों में बड़े अवसर: बिपुल सिन्हा

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एआई क्षेत्र में भारत-अमेरिका साझेदारी से कई क्षेत्रों में बड़े अवसर: बिपुल सिन्हा

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 10:20 AM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 10:20 AM IST

(योषिता सिंह)

न्यूयॉर्क, 16 फरवरी (भाषा) एआई संचालन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रूब्रिक के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिपुल सिन्हा ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में भारत तथा अमेरिका की मजबूत साझेदारी स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोजगार प्रशिक्षण एवं डिजिटल साक्षरता जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं पैदा कर सकती है।

सिन्हा ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं भारत-अमेरिका संबंधों का बड़ा पक्षधर रहा हूं क्योंकि अमेरिका के पास प्रौद्योगिकी ज्ञान, तकनीकी बौद्धिक संपदा और बड़े स्तर पर तकनीक विकसित करने की क्षमता है, जबकि भारत के पास विशाल मानव संसाधन, 1.4 अरब की आबादी, बड़ी युवा संख्या और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।”

वह 16 से 20 फरवरी तक नयी दिल्ली में होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेंगे। यह दुनिया भर के नेताओं, नीति-निर्माताओं और नवोन्मेषकों का वैश्विक सम्मेलन है, जिसमें एआई के भविष्य की दिशा पर चर्चा होगी।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर और व्हार्टन स्कूल के पूर्व छात्र सिन्हा ने 2014 में रुब्रिक की सह-स्थापना की थी जिसका मुख्यालय पालो आल्टो में है।

उन्होंने कहा कि निवेश और प्रौद्योगिकी भारत के विकास को गति दे रहे हैं, ‘‘इसलिए दोनों देशों का, खासकर एआई क्षेत्र में साथ आना लोगों तक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, नौकरी प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और एआई आधारित क्षमताएं पहुंचाने का बड़ा अवसर है।’’

सिन्हा ने इस बात पर बल दिया कि यदि किसी देश को करोड़ों लोगों को मध्यम वर्ग में लाना है तो “प्रौद्योगिकी ही इसका समाधान है।”

उन्होंने कहा, ‘‘एआई दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का माध्यम बन सकता है, जिससे अमेरिकी कंपनियां भारतीय संस्थाओं को सही तकनीक उपलब्ध करा सकें और भारत अपनी बड़ी आबादी को समृद्ध मध्यम वर्ग में बदल सके।’’

सिन्हा ने कृत्रिम मेधा को “हमारे जीवन की सबसे परिवर्तनकारी तकनीक” बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव व्यक्तियों, समाज, कारोबार और देशों सभी पर पड़ेगा।

उनके अनुसार, लोगों और समाज के लिए एआई का मतलब नयी नौकरी का प्रशिक्षण और काम के नए तरीके होंगे, जबकि कंपनियों के लिए इसमें जोखिम और अवसर दोनों होंगे।

सिन्हा ने कहा, “एआई 100 गुना अधिक अवसर देता है, लेकिन 100 गुना ज्यादा खतरे भी लाता है, क्योंकि अब कोई व्यक्ति दूर से ही आपके पूरे कारोबार को नियंत्रित कर सकता है और भारी नुकसान पहुंचा सकता है।”

उन्होंने कहा, ‘‘भारत तकनीकी प्रतिभा का बड़ा केंद्र है, इसलिए भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक सेवाएं देने में एआई बेहद महत्वपूर्ण होगा। सोचिए, 1.4 अरब लोगों वाले देश में एआई की मदद से बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य, शिक्षा और कई सेवाएं दी जा सकती हैं-यह बहुत बड़ा मौका है।’’

सिन्हा ने कहा, “मैं कहूंगा कि भारत सरकार और भारतीय कंपनियों ने साथ मिलकर बहुत अच्छा काम किया है और उन्होंने एआई आधारित नए तकनीकी केंद्रों के लिए करीब 100 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।’’

उन्होंने कहा, “डेटा सेंटर में निवेश, सरकार की कर छूट और एआई ढांचे में निवेश के साथ भारत बड़ी छलांग लगा रहा है। मुझे उम्मीद है कि भारत में निजी और सरकारी क्षेत्र सहित पूरा बाजार एआई पर केंद्रित है।”

भाषा

खारी नेत्रपाल

नेत्रपाल