इंस्टाग्राम ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर अपनाया ‘पूछो मत, बताओ मत’ का रवैया : पूर्व इंजीनियर

इंस्टाग्राम ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर अपनाया ‘पूछो मत, बताओ मत’ का रवैया : पूर्व इंजीनियर

इंस्टाग्राम ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर अपनाया ‘पूछो मत, बताओ मत’ का रवैया : पूर्व इंजीनियर
Modified Date: August 20, 2026 / 12:38 pm IST
Published Date: August 20, 2026 12:38 pm IST

ओकलैंड, 20 अगस्त (एपी) मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग निदेशक आर्तुरो बेजार ने एक महत्वपूर्ण मुकदमे में गवाही देते हुए कहा कि कंपनी ने अपने मंचों पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर ‘‘पूछो मत, बताओ मत’’ वाला रवैया अपनाया और सुरक्षा की तुलना में मुनाफे को प्राथमिकता दी।

गवाही के दूसरे दिन, बुधवार को बेजार ने कहा कि मेटा उत्पाद तैयार करते समय सुरक्षा से ज्यादा इस बात पर ध्यान देती थी कि लोग उसके मंचों का कितनी बार और कितनी देर तक इस्तेमाल करते हैं, भले ही इसका उनकी मानसिक सेहत पर प्रतिकूल असर पड़े।

यह मुकदमा मंगलवार को कैलिफोर्निया के ओकलैंड की संघीय अदालत में शुरू हुआ। इसमें मेटा का सामना कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी से है तथा सुनवाई करीब छह सप्ताह चलने की उम्मीद है। ये चार राज्य उन 29 राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने 2023 में बच्चों की सुरक्षा और निजता को लेकर मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। बाकी 25 राज्यों के मामलों में बाद में सुनवाई होगी।

मुकदमे में आरोप है कि मेटा ने बच्चों को अपने मंचों का आदी बनाने वाली सुविधाओं को जानबूझकर डिजाइन किया और इससे पैदा हुए युवा मानसिक स्वास्थ्य संकट में योगदान दिया। राज्यों का यह भी आरोप है कि कंपनी 13 साल से कम उम्र के बच्चों का उनके माता-पिता की सहमति के बिना डेटा एकत्र करती है, जो संघीय कानून का उल्लंघन है।

तेरह साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के बारे में पूछे जाने पर बेजार ने कहा, ‘‘खास तौर पर इंस्टाग्राम पर रवैया था—पूछो मत, बताओ मत।’’

मेटा ने आरोपों को खारिज करते हुये कहा है कि मुकदमे के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाएंगे।

मेटा के अधिवक्ता पॉल श्मिट ने कहा कि सुनवाई में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, सोशल मीडिया और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि मेटा अपनी जिम्मेदारी समझती है और किशोरों तथा माता-पिता के साथ मिलकर इन सवालों से निपटने का प्रयास करती है।

बेजार ने 2009 से 2015 तक फेसबुक में काम किया था और साइबरबुलिंग से निपटने के अपने काम के कारण चर्चित हुए। वह 2019 से 2021 के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर काम करने के लिए अनुबंध पर फिर कंपनी से जुड़े। 2023 में उन्होंने सोशल मीडिया और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य संकट को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष भी गवाही दी थी।

उस समय उन्होंने कहा था कि मेटा के अधिकारियों, जिनमें सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं, को इंस्टाग्राम से होने वाले नुकसान की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इससे निपटने के लिए सार्थक बदलाव नहीं किए।

बुधवार को बेजार ने कहा कि उत्पाद तैयार करने वाले कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन और वेतन-भत्तों में मुख्य रूप से उपयोगकर्ताओं की संख्या और उनके द्वारा उत्पादों पर बिताए जाने वाले समय को महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘उस संदर्भ में सुरक्षा बाद में आती थी।’’

राज्य सरकारें फेसबुक और इंस्टाग्राम के उपयोगकर्ता अनुभव में बदलाव के साथ-साथ वित्तीय हर्जाने की मांग कर रही हैं, जो अरबों डॉलर तक हो सकता है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने कहा कि मेटा के मुकदमा हारने की स्थिति में हर्जाने की राशि अदालत तय करेगी।

बेजार ने मेटा की कई सुविधाओं का भी उल्लेख किया, जिन्हें उनके अनुसार वयस्कों के लिए तैयार किया गया था, लेकिन वे ‘‘किशोरों के लिए स्वाभाविक रूप से असुरक्षित’’ हैं। इनमें वीडियो का अपने आप चलना और लाइक, व्यू, कमेंट तथा फॉलोअर्स की संख्या दिखाने वाले काउंटर शामिल हैं।

बाल विकास विशेषज्ञों के अनुसार किशोर वयस्कों की तुलना में सामाजिक तुलना के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए लोकप्रियता को पुरस्कृत करने वाली ऐसी सुविधाएं उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अधिक नुकसानदेह हो सकती हैं।

मेटा का कहना है कि संघीय बाल निजता कानूनों के अनुरूप उसके मंचों का इस्तेमाल करने के लिए उपयोगकर्ता की उम्र कम से कम 13 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, बेजार ने गवाही दी कि अपने शोध के दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर 13 वर्ष से कम उम्र के ‘‘दसियों हजार’’ बच्चे मिले थे।

उन्होंने कहा कि कंपनी में यह ‘‘आम जानकारी’’ थी कि इतनी कम उम्र के बच्चे इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर रहे हैं।

बेजार ने कहा कि फर्जी खातों का पता लगाने के लिए मेटा के पास ‘‘दुनिया के सबसे उन्नत बुनियादी ढांचों में से एक’’ है, लेकिन 13 वर्ष से कम उम्र के होने का संदेह वाले बच्चों की उम्र का पता लगाने और जांच करने के लिए कंपनी के पास ‘‘कोई लक्ष्य, कोई मापदंड’’ नहीं था।

मेटा समय-समय पर युवाओं के लिए अनुभव को सुरक्षित बनाने वाली सुविधाएं शुरू करने की बात कहती रही है। हालांकि, बेजार ने गवाही में कहा कि ये सुविधाएं प्रभावी नहीं थीं।

एपी मनीषा रंजन

रंजन


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