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Iran and America Talks Pakistan: इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्चस्तरीय वार्ता एक बार फिर सुर्खियों में है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अब तक करीब 15 से 21 घंटे तक गहन बातचीत हो चुकी है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। चर्चा का फोकस अब तकनीकी मुद्दों की ओर शिफ्ट हो गया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा से जुड़े अहम पहलू शामिल हैं। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं, जिससे समझौते की राह आसान नहीं दिख रही।
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान की बातचीत के बाद पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक़ डार का बयान,
” पाकिस्तान आगे भी अमेरिका और ईरान में शांति स्थापित करने में पूर्ण भूमिका निभाएगा , आने वाले दिनों में ये पूरा मामला सुलझा लिया जायेगा ,
हमें उम्मीद है कि… pic.twitter.com/D3OP2HAhe9
— Nargis Bano (@Nargis_Bano78) April 12, 2026
इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति के लिए अपनी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के राजनयिक प्रयासों की वजह से ही अमेरिका और ईरान एक ही मेज पर बातचीत के लिए तैयार हुए हैं। डार के मुताबिक दोनों पक्ष युद्धविराम और स्थायी शांति की दिशा में संवाद कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि जानकारों का मानना है कि बातचीत लंबी चल सकती है और अंतिम नतीजे तक पहुंचने में अभी और समय लग सकता है।
दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा कि अभी तक किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है। उनके अनुसार, ईरान ने अमेरिका की प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं किया है, जिससे वार्ता आगे बढ़ने में मुश्किल हो रही है। वेंस ने यह भी दोहराया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प हो सकता है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चाहे समझौता हो या न हो, अमेरिका ही अंततः इस स्थिति में विजेता रहेगा। उन्होंने चीन को भी चेतावनी देते हुए कहा कि वह ईरान को हथियारों की आपूर्ति न करे। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी जहाज ने हाल ही में इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश नहीं की, और यह भी स्पष्ट किया गया कि समुद्री मार्गों से गुजरने की अनुमति ईरानी सेना ही तय करती है। ईरान ने यह संकेत दिया है कि उसके आदेश के बिना कोई भी जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकता।