turkey on israel/ image source: wkipedia
Middle East War Latest Update: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े हालात पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि युद्धविराम के दिन भी इजरायल ने निर्दोष लोगों को निशाना बनाया और सैकड़ों लेबनानी नागरिकों की जान ली।
एर्दोगन ने कहा कि यह घटनाएं न केवल मानवता के खिलाफ हैं, बल्कि क्षेत्र में शांति प्रयासों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे “खून और नफरत से अंधे हो गए हैं” और उनके फैसले क्षेत्र को और अस्थिर बना रहे हैं।
एर्दोगन ने यह भी दावा किया कि अगर पाकिस्तान ने समय रहते मध्यस्थता नहीं की होती, तो तुर्की भी इस संघर्ष में सीधे शामिल हो सकता था। उनके अनुसार पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल ने हालात को और ज्यादा बिगड़ने से रोका है और कई देशों को बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने का मौका दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा और संवाद का रास्ता अपनाना जरूरी है।
बता दें कि,पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्चस्तरीय वार्ता एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अब तक करीब 15 से 21 घंटे तक गहन बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। बातचीत का फोकस अब तकनीकी मुद्दों पर शिफ्ट हो गया है, हालांकि मतभेद अब भी बरकरार हैं।
इस्लामाबाद में US-ईरान की बातचीत आज भी रहेगी जारी https://t.co/QFjfru1ZUw
— IBC24 News (@IBC24News) April 12, 2026
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा कि अभी तक किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है। उनके अनुसार, ईरान ने अमेरिका की प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं किया है, जिससे वार्ता आगे बढ़ने में मुश्किल हो रही है। वेंस ने यह भी दोहराया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प हो सकता है।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी जहाज ने हाल ही में इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश नहीं की, और यह भी स्पष्ट किया गया कि समुद्री मार्गों से गुजरने की अनुमति ईरानी सेना ही तय करती है। ईरान ने यह संकेत दिया है कि उसके आदेश के बिना कोई भी जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकता।