MP TET Exam Controversy: नरसिंहपुर: मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों के आंदोलन और TET परीक्षा से जुड़े विवाद पर स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सरकार के स्वतंत्र निर्णय का नहीं, बल्कि अदालत के आदेश से जुड़ा हुआ है। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षक चाहें तो एक दिन धरने पर बैठें या 100 दिन, लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार किसी भी स्थिति में अदालत के आदेश के खिलाफ जाकर अवमानना (कंटेंप्ट) नहीं कर सकती।
TET exam controversy: सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की कही बात
मंत्री ने शिक्षकों को सलाह देते हुए कहा कि अगर उन्हें किसी फैसले पर आपत्ति है तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करें। उन्होंने बताया कि सरकार भी इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को लेकर विधि विभाग से परामर्श कर रही है। साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि शिक्षक अनावश्यक आंदोलन कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का माहौल खराब हो रहा है। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल सरकार अपने रुख पर कायम है और आगे की दिशा अब न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही तय होगी।
MP teacher protest: क्या है पूरा मामला ?
TET Exam Controversy MP मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षकों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। अपनी मांगों को लेकर भारी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा जारी TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के आदेश के खिलाफ है। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि वे इस नए नियम को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, शिक्षकों ने राजधानी की सड़कों पर पैदल मार्च निकाला और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) पहुंचे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि कोई भी शिक्षक TET परीक्षा नहीं देगा। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि TET परीक्षा संबंधी आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शिक्षकों ने अब 18 अप्रैल की तारीख तय करते हुए व्यापक स्तर पर एक बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि भोपाल में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब बालाघाट के शिक्षक भी TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। शिक्षकों ने न केवल परीक्षा का विरोध किया, बल्कि सेवा अवधि पहली नियुक्ति से जोड़ने की भी मांग की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।