Iran Israel Missile Attack/Image Source: ANI
दुबई: Iran Israel Missile Attack: इजराइल के हमलों में ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी मारे गए जो इस्लामी गणराज्य की नेतृत्व व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन हमलों के जवाब में ईरान ने बुधवार को इजराइल और खाड़ी के अरब देशों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी को देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता था और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के स्वयंसेवी ‘बासिज’ बल के प्रमुख थे।
Iran Israel Missile Attack: ईरान ने दोनों नेताओं की मौत की पुष्टि की है। जनवरी में देश की 47 साल पुरानी धार्मिक शासन व्यवस्था को चुनौती देने वाले प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई में दोनों ने अहम भूमिका निभाई थी। ईरान ने बुधवार को इजराइल की ओर मिसाइलों की बौछार की जिसके कारण देश के मध्य हिस्सों में सायरन बजने लगे और तेल अवीव में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी। इजराइल की आपातकालीन चिकित्सा सेवा ‘मेगेन डेविड एडोम’ के अनुसार, तेल अवीव के पूर्व में स्थित रमात गन इलाके में दो लोगों की मौत हो गई। वहीं सऊदी अरब, कुवैत और अन्य अरब देशों को भी बुधवार को ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन हमलों को हवाई रक्षा प्रणालियों ने बीच में ही रोक कर निष्क्रिय कर दिया।
Iran Israel Missile Attack: इजराइल का कहना है कि ईरान के इन अधिकारियेां को ईरानी शासन को कमजोर करने के लिए मारा गया। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने मंगलवार को कहा कि अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को रात में हमलों में ‘‘मार गिराया गया।’’ इजराइली सेना ने बताया कि तेहरान में ‘बासिज’ बल के 10 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इन हत्याओं का उद्देश्य ‘ईरान में शासन को कमजोर करना है ताकि ईरानी जनता को इसे हटाने का अवसर मिल सके।’’ युद्ध शुरू होने के बाद से हालांकि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कोई संकेत नहीं मिले हैं। वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि तेहरान का तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ में जरा भी ढील देने का कोई इरादा नहीं है। इस जलमार्ग से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।