तेहरान, आठ सितंबर (एपी) ईरान ने पेट्रोल का अधिक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए मंगलवार तड़के इसकी कीमत बढ़ा दी। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी।
कई महीनों से जारी युद्ध के कारण देश पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच पेट्रोल की कीमत में दिसंबर के बाद दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है।
पेट्रोल की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी संवेदनशील मुद्दा हो सकती है और इससे महंगाई बढ़ सकती है। वर्ष 2019 में कीमत बढ़ाए जाने के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे और ऐसा बताया जाता है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई में 300 से अधिक लोग मारे गए थे।
सरकार ने अमेरिका के साथ युद्ध का स्पष्ट रूप से उल्लेख किए बिना अपने फैसले के लिए ‘‘मौजूदा स्थिति’’ का हवाला दिया और कहा कि कीमत बढ़ाने से मिलने वाली अतिरिक्त राशि परिवारों को दी जाएगी।
नयी व्यवस्था के तहत एक महीने में अपने 110 लीटर पेट्रोल के कोटे से अधिक पेट्रोल खरीदने वाले लोगों को अब प्रति लीटर 1,00,000 रियाल (करीब सात सेंट) चुकाने होंगे। यह दिसंबर से अब तक उनके द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत से दोगुनी है।
ईरान अब भी उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल की कीमत सबसे कम है लेकिन इस बढ़ोतरी से देश की नौ करोड़ से अधिक आबादी में से कई लोगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। ईरानी मुद्रा पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर रही है और लोगों की क्रय शक्ति कमजोर हुई है। सोमवार को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 22.2 लाख रियाल थी।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, सरकारी तेल वितरण कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) केरामत वीस करामी ने सोमवार को कहा कि पेट्रोल की नयी कीमत से 15 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
करामी ने कहा कि अगस्त में पेट्रोल की खपत रिकॉर्ड 14.5 करोड़ लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई जबकि देश की घरेलू उत्पादन क्षमता 12.2 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। बाकी जरूरत आयात से पूरी की जाती है।
कीमत बढ़ाने से पेट्रोल की अत्यधिक खपत कम करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों ने खपत बढ़ने के लिए ईरान में पुरानी कारों और कल-पुर्जों के इस्तेमाल के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन की अपर्याप्त व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने से देश में महंगाई और बढ़ेगी। देश के सांख्यिकी केंद्र के अनुसार, ईरान पहले ही करीब 67 प्रतिशत की वार्षिक महंगाई दर से जूझ रहा है।
ईरान में कई पीढ़ियों से सस्ते पेट्रोल को एक तरह का जन्मसिद्ध अधिकार माना जाता रहा है। पेट्रोल की कीमत बढ़ने के कारण देश में 1964 में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। उस समय कीमतों में वृद्धि के खिलाफ टैक्सी चालकों की हड़ताल के बाद देश के शाह को सड़कों पर टैक्सियों की जगह सैन्य वाहनों को उतारना पड़ा था।
एपी सिम्मी गोला
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