(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (भाषा) ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता पहले पाकिस्तान के माध्यम से परोक्ष रूप से और बाद में दोनों पक्षों के बीच सीधे तौर पर हुई। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
पूरी प्रक्रिया के हर चरण में पाकिस्तान शामिल रहा। वार्ता की शुरुआत शनिवार को अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों की प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकों से हुई।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया, जबकि अमेरिकी टीम की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की।
सूत्रों के अनुसार, इसके बाद वार्ता सीधे बातचीत के चरण में पहुंची, जो पाकिस्तानी अधिकारियों की मौजूदगी में करीब ढाई घंटे तक चली।
अगले चरण में एक घंटे का विराम लिया गया और दोनों पक्षों की मांगों के तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञ स्तर पर चर्चा की गई। तकनीकी पहलुओं पर संदेशों का आदान-प्रदान देर रात तक जारी रहा।
हालांकि, रविवार सुबह तक यह स्पष्ट हो गया कि मतभेद दूर नहीं हो सके, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने एक संक्षिप्त संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान को आगे भी वार्ता के दौर होने की उम्मीद है, हालांकि अभी तक न तो कोई तारीख तय हुई है और न ही स्थान।
पाकिस्तान सरकार ने पूर्व में कहा था कि वह मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभाती रहेगी और उम्मीद जताई थी कि यह वार्ता विवाद के समाधान की दिशा में एक कदम साबित होगी।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा था, जबकि अमेरिकी टीम शनिवार सुबह यहां पहुंची।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर और पश्चिम एशिया के दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल थे, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
दोनों पक्ष आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के कुछ दिन बाद इस्लामाबाद पहुंचे थे। यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के बीच पहली प्रत्यक्ष उच्चस्तरीय वार्ता थी।
आमने-सामने की बातचीत के बावजूद समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के इस नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाषा गोला नेत्रपाल
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