मर्लिन मुनरो के अंतिम घर पर फिर बहस, अभिनेत्री के सपनों और विरासत पर नई चर्चा

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मर्लिन मुनरो के अंतिम घर पर फिर बहस, अभिनेत्री के सपनों और विरासत पर नई चर्चा

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 12:38 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 12:38 PM IST

(एना साल्जबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा)

एडिनबरा (ब्रिटेन), 29 मई (द कन्वरसेशन) हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो की महज 36 वर्ष की आयु में हुई असमय मृत्यु लंबे समय से रहस्य और चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी मौत को लेकर अनेक तरह की कथाएं और अटकलें दशकों से चर्चा में रही हैं।

मुनरो अपने अंतिम घर में केवल छह महीने रहीं, लेकिन जिस घर में उनकी मृत्यु हुई, वह अब प्रशंसकों के लिए लगभग तीर्थस्थल जैसा बन गया है। यह स्थिति वैसी ही है जैसी लॉस एंजिलिस स्थित उनके स्मारक वेस्टवुड विलेज मेमोरियल पार्क की है।

इस आकर्षण घर का व्यावहारिक असर भी देखने को मिला है। इस वर्ष घर के मौजूदा मालिकों ने ‘सिटी ऑफ लॉस एंजिलिस’ के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उनका आरोप है कि 2024 में इस संपत्ति को ‘ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्मारक’ घोषित किए जाने से वे मकान को गिराकर वहां पुनर्विकास नहीं कर पा रहे हैं।

शहर प्रशासन का कहना है कि संपत्ति के मालिकों को पहले से जानकारी थी कि यह घर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है और भविष्य में इसे विरासत स्थल का दर्जा मिल सकता है। प्रशासन के अनुसार, मुनरो की पहचान हमेशा इस घर से जुड़ी रहेगी।

लेखक ने अपने हालिया शोध में यह समझने का प्रयास किया कि ‘फिफ्थ हेलेना’ नामक यह घर मुनरो के लिए उनके जीवनकाल में क्या मायने रखता था। शोध में यह भी बताया गया कि घर की वास्तुकला स्मृति, स्थान और उनसे जुड़ी किंवदंतियों के प्रश्नों को कैसे जन्म देती है।

अशांत अतीत की झलक

मुनरो का जन्म 1926 में लॉस एंजिलिस में हुआ था और उनका बचपन अस्थिर परिस्थितियों में बीता। जिस मकान का नंबर 12305 था, उसका निर्माण तीन वर्ष बाद ब्रेंटवुड इलाके में हुआ, जो उस समय प्रतिष्ठित आवासीय क्षेत्र माना जाता था।

करीब 2,000 वर्ग फुट में बने इस घर का स्वरूप अपेक्षाकृत साधारण था, लेकिन इसका स्पेनिश-औपनिवेशिक शैली का डिजाइन अपने भीतर इतिहास की जटिल परतें समेटे हुए था। लाल टाइलों की छत, सफेद प्लास्टर की दीवारें और मेहराबदार खिड़कियां उस दौर की स्थापत्य शैली का हिस्सा थीं, जो कैलिफोर्निया के औपनिवेशिक अतीत को रोमांटिक रूप में प्रस्तुत करती थीं।

वास्तु इतिहासकारों के अनुसार, 19वीं शताब्दी के अंत से लेकर 1930 के दशक तक लोकप्रिय रही ‘रिवाइवल आर्किटेक्चर’ ने स्पेनिश औपनिवेशिक विरासत को महिमामंडित किया, जबकि मूल निवासियों पर हुए अत्याचारों की अनदेखी की गई।

हालांकि बाद के वर्षों में लोकप्रिय संस्कृति और पर्यटन उद्योग ने मेक्सिको को एक आकर्षक और रोमांचकारी सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। 1962 में यह घर खरीदने के बाद मुनरो ने इसे ‘‘एक असली छोटा मेक्सिकन घर’’ बताया था।

उम्मीदों और संभावनाओं का घर

जहां बाद के वर्षों में इस घर को मुनरो के दुखद अंतिम दिनों के प्रतीक के रूप में देखा गया, वहीं स्वयं मुनरो इसे संभावनाओं और सुकून की जगह मानती थीं।

उन्होंने अपने करीबी लोगों से बातचीत और पत्रों में घर की निजता, मजबूत दीवारों, सुरक्षित खिड़कियों और स्विमिंग पूल के आसपास के छोटे लेकिन आरामदायक परिसर की प्रशंसा की थी। घर को सजाने के लिए वह मेक्सिको से सामान भी लाई थीं।

मुनरो इस घर को अपने उन मित्रों के लिए सुरक्षित आश्रय के रूप में देखती थीं जो किसी परेशानी में हों। घर के प्रवेश द्वार पर लगी प्रसिद्ध टाइल, जिस पर लैटिन में ‘कुर्सुम पर्फिसियो’ यानी ‘यात्रा का अंत’ लिखा था, उन्हें आशा का प्रतीक लगती थी।

हालांकि उनकी मृत्यु के बाद उनके कुछ करीबी मित्रों ने इसी घर को उदासी और अधूरेपन का प्रतीक बताया। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि घर की सजावट उनके मनोचिकित्सक राल्फ ग्रीन्सन के घर जैसी थी, जिससे मुनरो की व्यक्तिगत पहचान पर सवाल उठाए गए।

लेख में कहा गया है कि यह दृष्टिकोण मुनरो की अपनी पसंद और निर्णय क्षमता को नजरअंदाज करता है। 1961 में वह गायक फ्रैंक सिनात्रा के एक आधुनिक शैली वाले घर में भी रह चुकी थीं। ऐसे में 12305 नंबर का यह घर चुनना उनके सोच-समझकर लिए गए सौंदर्यबोध का हिस्सा था।

लेख के अनुसार, समय के साथ मुनरो के जीवन और मृत्यु से जुड़ी दुखद कहानियों ने उन्हें एक गृहस्वामिनी और निजी जीवन जीने वाली महिला के रूप में देखने की संभावना को धुंधला कर दिया।

मुनरो ने अपने अंतिम साक्षात्कार की तैयारी के दौरान कहा था, ‘‘मैं नहीं चाहती कि हर कोई ठीक-ठीक देखे कि मैं कहां रहती हूं…। मैं चाहती हूं कि मैं हर व्यक्ति की कल्पना का हिस्सा बनी रहूं।’

लेख में कहा गया है कि आज भी लोग उस घर में मुनरो की मृत्यु के रहस्य को खोजते हैं, जबकि शायद अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि वह जीवित रहतीं तो उस घर में उनका जीवन कैसा होता।

द कन्वरसेशन मनीषा शोभना

शोभना