नेपाल ने भारत से राष्ट्रीय पहचान पत्र को यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया

नेपाल ने भारत से राष्ट्रीय पहचान पत्र को यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया

नेपाल ने भारत से राष्ट्रीय पहचान पत्र को यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया
Modified Date: July 26, 2026 / 02:39 pm IST
Published Date: July 26, 2026 2:39 pm IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 26 जुलाई (भाषा) नेपाल ने भारत की यात्रा पर आने वाले नेपाली नागरिकों के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) को वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

इस कदम के लागू होने पर नागरिकता प्रमाणपत्र और पासपोर्ट के साथ-साथ राष्ट्रीय पहचान पत्र का भी यात्रा दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

आव्रजन विभाग के प्रवक्ता टीका राम ढकाल ने बताया कि विभाग ने राजनयिक माध्यमों से यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है और भारत की यात्रा के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मान्यता देने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने गृह मंत्रालय के माध्यम से यह प्रस्ताव पहले ही विदेश मंत्रालय को भेज दिया था और विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के संबंधित अधिकारियों को अग्रेषित कर दिया है।’’

ढकाल ने कहा, ‘‘हम इस मामले में काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं और भारत की ओर से औपचारिक जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो राष्ट्रीय पहचान पत्र हवाई और सड़क, दोनों मार्गों से भारत की यात्रा करने वाले नेपाली नागरिकों के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र और पासपोर्ट के साथ तीसरा वैध पहचान दस्तावेज बन जाएगा।

ढकाल ने उम्मीद जताई कि भारत नेपाल के इस अनुरोध पर जल्द सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा।

वर्तमान में भारत की यात्रा करने वाले नेपाली नागरिकों, विशेषकर हवाई मार्ग से यात्रा करने वालों के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र या पासपोर्ट साथ रखना अनिवार्य है। वहीं, हवाई मार्ग से नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पासपोर्ट या भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र साथ रखना आवश्यक होता है।

नेपाल ने 2018 में सार्वजनिक प्रशासन के आधुनिकीकरण के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय पहचान पत्र लागू किया था। सरकारी कार्यालयों और बैंकिंग क्षेत्र में सेवाओं का लाभ लेने के लिए इसे अनिवार्य बनाया गया है।

नेपाल सरकार की योजना भविष्य में पारंपरिक नागरिकता प्रमाणपत्र के स्थान पर बायोमीट्रिक पहचान पत्र को लागू करने की भी है।

भारत और नेपाल के बीच 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि के तहत खुली सीमा व्यवस्था है, जिसके कारण दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहां यात्रा और काम कर सकते हैं।

दोनों देशों के बीच हालांकि हवाई और सड़क मार्ग से यात्रा के लिए निर्धारित पहचान दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य है।

भाषा रवि कांत रवि कांत सिम्मी

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