नेपाल के विदेश मंत्री ने प्राकृतिक त्रासदी के बाद समर्थन के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आभार जताया

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नेपाल के विदेश मंत्री ने प्राकृतिक त्रासदी के बाद समर्थन के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आभार जताया

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  • Publish Date - August 29, 2026 / 09:23 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 09:23 PM IST

काठमांडू, 29 अगस्त (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने देश में गत बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा दिये गए समर्थन और मदद के लिए शनिवार को आभार जताया।

इस प्राकृतिक आपदा में 650 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2400 लोग अब भी लापता हैं।

खनाल ने राष्ट्रीय और विदेशी मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद और समर्थन लेने से इनकार कर दिया है।

मंत्री ने आपदा के बाद सिंहदरबार में अपनी पहली प्रेस वार्ता के दौरान कहा, ‘‘हमने राष्ट्रीय और विदेशी मीडिया में कुछ ऐसी झूठी खबरें देखी हैं जिनमें कहा गया है कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद और समर्थन लेने से इनकार कर दिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तबाही के पैमाने को देखते हुए, मदद और सहयोग की ज़रूरत केवल बचाव और राहत के चरण में ही नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण के चरण में अधिक है।’’

खनाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उनके समर्थन और सहायता के लिए धन्यवाद भी दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘इस मुश्किल समय में एकजुटता, सद्भावना और समर्थन के लिए हम अपने दोस्तों और सहयोगियों के बहुत आभारी हैं।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘हमें भारत से 57 टन से अधिक राहत सामग्री मिली है। शनिवार को चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य मित्र देशों से भी जरूरी मदद मिल रही है।’’

मंत्री ने कहा कि राहत कार्य जारी रहने के साथ-साथ और आकलन भी किए जा रहे हैं तथा नेपाल अतिरिक्त मदद और सहयोग के लिए अपने पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से संपर्क करेगा।

नेपाल को खोज और बचाव कार्यों के लिए विदेशी मदद की जरूरत के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार मित्र देशों से खास और विशेष मदद स्वीकार करेगी।

खनाल ने शुक्रवार को कहा था, ‘‘अंतरराष्ट्रीय मदद को स्वीकार करने से इनकार नहीं किया गया था बल्कि बचाव की रणनीति राष्ट्रीय क्षमता, तत्काल जरूरत और नेपाल की अनोखी भौगोलिक स्थिति के आधार पर तय की गई थी।’’

उन्होंने कहा था, ‘‘चूंकि अनजान इलाके में बाहरी बचाव दल को तैनात करने से तालमेल और तकनीकी प्रबंधन में जटिलता आ सकती है और इससे अप्रत्याशित जोखिम भी पैदा हो सकते हैं, इसलिए बचाव अभियान देश की उपलब्ध क्षमता का इस्तेमाल करके ही चलाए गए।’’

बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने से बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर बहा और इसकी चपेट में आए कस्बे और गांव तबाह हो गए। अचानक आई इस बाढ़ ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया और पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भी संकट के समय मदद करने की भारत की कोशिशों की तारीफ की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बेहद उदार’ बताया।

वागले ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा कि भारत ने संकेत दिया है कि वह पुनर्निर्माण कार्य में पूरी मदद करेगा।

भारत ने अब तक नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में 57.6 टन राहत सामग्री भेजी है। काठमांडू के अनुरोध पर, स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए चिकित्सा कर्मी और सुरंग बचाव विशेषज्ञों से युक्त 11 सदस्यों की एक भारतीय टीम भी नेपाल पहुंची है।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश