संभावनाओं की कोई सीमा नहीं, छात्र बड़े सपने देखें : शुभांशु शुक्ला

Ads

संभावनाओं की कोई सीमा नहीं, छात्र बड़े सपने देखें : शुभांशु शुक्ला

  •  
  • Publish Date - August 29, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 09:47 PM IST

नयी दिल्ली/गाजियाबाद, 29 अगस्त (भाषा) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र जाने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने शनिवार को छात्रों से पारंपरिक करियर लक्ष्यों से आगे बढ़कर सपने देखने और देश के बदलाव में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनके या भारत के लिए संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है।

शांति काल के शीर्ष वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित शुक्ला ने गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में आयोजित छठे डॉ. राजाराम जयपुरिया स्मारक व्याख्यान में ‘द इंडियन सेंचुरी: यूथ, इनोवेशन एंड नेशन बिल्डिंग – नई सोच, नई उड़ान’ पर अपने विचार रखे।

उन्होंने छात्रों से कहा, ‘‘ संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है। न मेरे लिए, न आपके लिए और न ही भारत के लिए।’’

शुक्ला ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को पृथ्वी के बाहर के जीवन की झलक दिखाई और उन्हें जिज्ञासा जगाने तथा ब्रह्मांड के बारे में वैज्ञानिक समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, ‘‘अंतरिक्ष से भारत ‘सारे जहाँ से अच्छा’ जैसा दिखता है।’’

अंतरिक्ष विज्ञान से आगे बढ़कर, शुक्ला ने महत्वाकांक्षा, असफलता और मुश्किलों से उबरने की क्षमता के बारे में बात की। उन्होंने छात्रों से ऐसे लक्ष्य तय करने का आग्रह किया, जो केवल नौकरी पाने से कहीं आगे हों।

उन्होंने कहा, ‘‘केवल यह मत सोचिए कि ‘मुझे नौकरी मिल जाए’… बल्कि यह सोचिए कि ‘मुझे भारत को बदलना है’।’’

शुक्ला ने कहा कि 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के लक्ष्य को पूरा करने में युवा अहम भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने छात्रों से कहा, ‘‘हर कोई गलतियां करता है। उन्हें छिपाएं नहीं। अपनी असफलता को स्वीकार करना ही सफलता की ओर आपकी यात्रा की शुरुआत है।’’

शुक्ला ने लगातार कोशिश करते रहने के महत्व को रेखांकित करते हुए एक अंतरिक्ष यात्री की कहानी सुनाई, जिसे 10वीं बार में सफलता मिलने से पहले नौ बार असफलता का सामना करना पड़ा था। बाद में, अंतरिक्ष में बिताए समय के लिहाज से वह अपनी टीम की सबसे अनुभवी सदस्य बनीं।

उन्होंने कहा कि इस कहानी से पता चलता है कि युवाओं को असफलता से डरना नहीं चाहिए और पूरे संकल्प, कड़ी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्यों को पाने की कोशिश जारी रखनी चाहिए।

डॉ. राजाराम जयपुरिया स्मारक व्याख्यान में पहले भी कई जानी-मानी हस्तियां अपने विचार व्यक्त कर चुकी हैं, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और प्रमुख हिंदू धार्मिक नेता स्वामी स्वरूपानंद जैसे लोग शामिल हैं।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप