गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति के कार्यकाल के आरोपों की जांच करेंगे सेवानिवृत्त न्यायाधीश

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गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति के कार्यकाल के आरोपों की जांच करेंगे सेवानिवृत्त न्यायाधीश

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  • Publish Date - August 29, 2026 / 09:37 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 09:37 PM IST

अहमदाबाद, 29 अगस्त (भाषा) गुजरात विश्वविद्यालय ने पूर्व कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता के कार्यकाल के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. एम. व्यास की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति का शनिवार को गठन किया।

कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी ने कहा कि समिति अनियमित नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं, धन के गबन और परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारों के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।

जोशी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि न्यायमूर्ति व्यास के साथ चर्चा की गई है और जांच प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामले अक्सर अंत में उच्च न्यायालय पहुंच जाते हैं, इसलिए विश्वविद्यालय ने सभी पहलुओं को शामिल करने और जांच को निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के लिए पहले ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करने का फैसला किया है।

यह घटनाक्रम नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समेत छात्र संगठनों की ओर से लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

इन संगठनों ने डॉ. गुप्ता पर वित्तीय अनियमितताओं, केंद्रीय अनुदान के दुरुपयोग और बहुत अधिक वेतन पर अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति कर विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

सोशल मीडिया मंचों पर आरोपियों की ओर से दिए गए सार्वजनिक स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए जोशी ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय को उनकी ओर से या उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई औपचारिक लिखित सूचना नहीं मिली है।

इस महीने की शुरुआत में, विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय तथ्यान्वेषण समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद गुजरात यूनिवर्सिटी स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड रिसर्च फाउंडेशन (आईडीएसआरएफ) के सीईओ समेत 10 अस्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था।

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि गुप्ता ने इन लोगों की नियुक्ति की और उन्हें अत्यधिक अधिक वेतन दिया, जिससे विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान हुआ।

भाषा आशीष माधव

माधव