(विनय शुक्ला)
मॉस्को, चार अप्रैल (भाषा) क्रेमलिन समर्थित रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) के नव निर्वाचित अध्यक्ष ने रूस के दो एशियाई रणनीतिक साझेदारों भारत और चीन के बीच ‘सकारात्मक’ संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया है।
वैश्विक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. दिमित्री ट्रेनिन ने एक अप्रैल को प्रतिष्ठित विचार मंच आरआईएसी का नेतृत्व करने के लिए चुने जाने के बाद प्रेस को दिए गए अपने पहले साक्षात्कार में ये बातें कहीं।
प्रमुख दैनिक कोमर्सेंट में शुक्रवार को प्रकाशित एक साक्षात्कार में ट्रेनिन ने कहा, ‘‘हमें अपने रणनीतिक साझेदारों चीन और भारत के बीच सकारात्मक संतुलन को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि अमेरिकी या कोई अन्य भारत का इस्तेमाल चीन के खिलाफ और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से हमारे खिलाफ न कर सके।’’
ट्रेनिन ने आगे कहा, ‘‘हमारा सबसे बड़ा पड़ोसी चीन स्वाभाविक रूप से हमारी ओर से सबसे करीब से ध्यान दिए जाने का पात्र है। इस पर व्यवस्थित रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। यही बात भारत पर भी लागू होती है, जिसके बारे में हमारी सकारात्मक, हालांकि अब भी कुछ हद तक सतही धारणा है।’’
सोवियत-रूसी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल 70 वर्षीय ट्रेनिन का संबंध अमेरिका-रूस के बीच परमाणु और अंतरिक्ष हथियार वार्ताओं से रहा है।
उन्होंने आरआईएसी के अध्यक्ष के रूप में अपनी योजनाओं के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं: हम किसी के दबाव में नहीं आएंगे। हम दुनिया को बिखरने नहीं देंगे।’’ उन्होंने मौजूदा समय को उथल-पुथल भरा और नाटकीय बताया।
उन्होंने 1994 में कार्नेगी मॉस्को सेंटर में काम शुरू किया था, लेकिन क्रेमलिन के यूक्रेन अभियान का समर्थन करने के कारण उन्हें 2022 में निदेशक पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि वह ‘तीसरा विश्व युद्ध’ वाक्यांश का प्रयोग करना पसंद नहीं करते क्योंकि इससे प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में जो हुआ था उसकी निरंतरता का आभास होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अधिक सटीक वाक्यांश ‘एक नया विश्व युद्ध’ है, जो पहले दो युद्धों से अलग है।’’
रूस के आरआईएसी की स्थापना 15 वर्ष पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के आदेश से हुई थी। यह भारतीय विश्व मामलों की परिषद (आईसीडब्ल्यूए) की समकक्ष संस्था है।
भाषा संतोष धीरज
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