सियोल, 10 जनवरी (एपी) उत्तर कोरिया की सेना ने दक्षिण कोरिया पर सीमा के पार ड्रोन उड़ाने का शनिवार को आरोप लगाया और चेतावनी दी कि सियोल को अपने इस “अक्षम्य उकसावे भरे कृत्य” के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
हालांकि, दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरियाई सेना के आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इससे उत्तर कोरिया से द्विपक्षीय संबंध बहाल करने के दक्षिण कोरिया की उदारवादी सरकार के प्रयासों को झटका लगने की आशंका जताई जा रही है।
‘कोरियन पीपुल्स आर्मी’ के जनरल स्टाफ ने एक बयान में दावा किया कि उत्तर कोरियाई बलों ने देश के सीमावर्ती कस्बे के ऊपर उड़ रहे दक्षिण कोरियाई ड्रोन को विशेष इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों का इस्तेमाल कर मार गिराया।
बयान में कहा गया है कि ड्रोन दो कैमरों से लैस था, जिनके जरिये अज्ञात क्षेत्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही थी। इसमें कहा गया है कि पिछले साल 27 सितंबर को भी दक्षिण कोरिया के एक ड्रोन ने उत्तर कोरिया के वायु क्षेत्र का उल्लंघन किया था, जिसके बाद उत्तर कोरियाई बलों ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों से हमला कर उसे मार गिराया।
बयान के मुताबिक, ड्रोन के मलबे की जांच के दौरान अधिकारियों ने उसमें भी उत्तर कोरिया के प्रमुख प्रतिष्ठानों से जुड़ी वीडियो रिकॉर्डिंग पाई थी।
इसमें कहा गया है, “हम दक्षिण कोरियाई गुंडों की ओर से हमारी संप्रभुता के लगातार उल्लंघन और हमारे खिलाफ खुलेआम किए जा रहे उकसावे वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं। दक्षिण कोरियाई सेना के युद्धोन्मादियों को निश्चित रूप से अपने अक्षम्य उकसावे भरे कृत्य के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
हालांकि, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने उत्तर कोरिया की ओर से बताए गए समय के दौरान किसी भी ड्रोन का संचालन नहीं किया। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी किम हॉन्ग-शियोल ने दावा किया कि दक्षिण कोरिया के पास उस तरह के ड्रोन भी नहीं हैं, जिनके इस्तेमाल का उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया है।
हॉन्ग-शियोल ने कहा कि दक्षिण कोरियाई अधिकारी इस बात की जांच करेंगे कि क्या नागरिकों ने उत्तर कोरिया में मिले ड्रोन उड़ाए थे। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया का उत्तर कोरिया को उकसाने का कोई इरादा नहीं है और वह दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बहाल करने के प्रयास जारी रखेगा।
जून में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद सेली जे म्युंग ने उत्तर कोरिया के साथ वार्ता फिर से शुरू करने और दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच सुलह कराने के लिए पुरजोर प्रयास किए हैं। हालांकि, उत्तर कोरिया ने ली के प्रयासों को लगातार नजरअंदाज किया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के मुद्दे पर विवाद के चलते 2019 में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उच्चस्तरीय परमाणु कूटनीति विफल हो गई थी, जिसके बाद उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत से किनारा कर लिया था।
एपी पारुल सुरेश
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